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गंगा का जलस्तर बढ़ने से काशी के प्रमुख श्मशान घाटों मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट की तस्वीर बदल गई है। मणिकर्णिका घाट का निचला हिस्सा बाढ़ के पानी में डूब गया है, जिससे अंतिम संस्कार के लिए उपलब्ध जगह करीब पांच गुना कम हो गई है। इसलिए घाट से 15 फीट ऊपर छत पर अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। जहां सामान्य दिनों में एक साथ 50 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार होता था, वहीं अब केवल 8 से 10 चिताएं ही एक साथ जल पा रही हैं। इसके चलते शवदाह के लिए 3 से 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। नीचे पानी, ऊपर छत पर जल रहीं चिताएं
मणिकर्णिका घाट के निचले हिस्से में पानी भरने के बाद अब घाट के सबसे ऊपरी हिस्से में बने खुले छत वाले स्थान पर ही शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। जगह कम होने के कारण एक चिता के बुझने का इंतजार दूसरी चिता के लिए करना पड़ रहा है। बारिश इस व्यवस्था को और मुश्किल बना रही है। खुले स्थान पर बारिश होने से लकड़ियां गीली हो जाती हैं। गीली लकड़ियों में आग पकड़ने में समय लगता है और कई बार अंतिम संस्कार में घंटों लग जाते हैं। नीचे रखी लकड़ियां भी पानी से भीग रही हैं। इन्हें बचाने के लिए छतों और ऊपरी गलियों में रखा जा रहा है। 3-4 घंटे इंतजार के बाद मिल रही जगह
डोम समाज के मुताबिक, घाट पर अंतिम संस्कार के लिए 3 से 4 घंटे की वेटिंग चल रही है। दूर-दराज से शव लेकर पहुंचे परिजन घाट पर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। कई परिवारों को सीमित जगह और बारिश के बीच शव के अंतिम संस्कार के लिए घंटों रुकना पड़ रहा है। डोम समाज के ऋषिकेश चौधरी ने कहा अब लाश जलाने के लिए केवल एक छत ही बची है। ज्यादा लोग आ जाएंगे तो वो इंतजार करें या कहीं और जलाएं। बाढ़ का पानी सितंबर-अक्टूबर तक रहेगा। तब तक तो ऐसे ही चलेगा। लकड़ियां रखने की जगह भी नहीं बची
ऋषिकेश ने कहा – बाढ़ का पानी बढ़ने से सिर्फ अंतिम संस्कार की जगह ही कम नहीं हुई है, बल्कि लकड़ियां रखने की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। निचले हिस्से में रखी लकड़ियां गीली हो रही हैं। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए ऊपरी हिस्सों में ले जाना पड़ रहा है। इससे घाट की संकरी गलियों और छतों पर भी जगह कम पड़ रही है। दैनिक भास्कर की टीम ने शव लेकर आये लोगी से बात की जानिए उन्होंने क्या कहा..… आजमगढ़ से मणिकर्णिका घाट पहुंचे मनोज विश्वकर्मा ने कहा-भेड़ भाड़ में लावारिस की तरह लाश जलाई जा रही है। उनका कहना है कि हिंदू रीति रिवाज में शव के 5 फेरे लिए जाते हैं लेकिन इतने पास शव जलाई जा रहे हैं कि हम लोग वहां नहीं जा पा रहे हैं। इसके अलावा गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण यहां बैठने की जगह नहीं है काफी भीड़ है जिस कारण दिक्कत हो रही। आने जाने और बैठने में हो रही दिक्कत
अनुराग गुप्ता ने कहा कि पानी भर जाने के कारण लाश नहीं जल का रही है। उन्होंने कहा कि हम लोग फेरा नहीं ले पा रहे हैं इसके अलावा शव जलाने के लिए भी तीन से चार घंटे इंतजार करने पड़ रहे हैं जो लोग हम लोगों के साथ आए हैं वह गलियों में बैठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा यहां साफ सफाई की व्यवस्था नहीं है। 5 फीट चौड़ी सीढ़ी है उसी से ऊपर जाना पड़ रहा है और उसी से लोग नीचे भी आ रहे हैं दुर्घटना हो सकती है। मणिकर्णिका के बाद हमने हरिशचंद्र घाट की स्थिति जानी जानिए वहां के लोगों ने क्या कहा… हरिश्चंद्र घाट पर निर्माण कार्य चल रहा है इसलिए घाट के गलियों में जाने वाला रास्ता सिर्फ 8 फीट चौड़ा है। और जहां शव दाह हो रहा है वह गली सिर्फ 5 फीट चौड़ी है और उसके आसपास डोम परिवार का घर लेकिन काशी के श्मशान घाट पर 24 घंटे शवदाह होता है इसलिए यह व्यवस्था चालू है। दरसल,हरिश्चंद्र घाट पूरी तरह गंगा के जल में समा गया है। घाट की सीढ़ियां डूबने के कारण अब यहां शवों का अंतिम संस्कार गलियों में किया जा रहा है। सीमित जगह होने से शव यात्रियों को अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, जिन गलियों में शवदाह हो रहा है, वहां रहने वाले लोगों को भी कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अब गली में शव दाह कर रहे, बहुत मुश्किल हो रही
हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह कराने वाले नन्हे चौधरी ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ने के बाद घाट की सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं। ऐसे में मजबूरी में गलियों में शवों का अंतिम संस्कार कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हर साल बाढ़ के दौरान इसी तरह के हालात बनते हैं। इससे डोमराजा समाज के साथ शव लेकर आने वाले लोगों को भी काफी दिक्कत होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन गलियों से होकर शवदाह स्थल तक पहुंचा जा रहा है, वहां गंदगी का अंबार लगा हुआ है। नगर निगम की ओर से नियमित सफाई नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। बारिश और बाढ़ के बीच गंदगी से स्थिति और खराब हो गई है। वहीं, अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को भी मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। घाट की सीढ़ियां डूबने के कारण लोगों को गलियों में अपनी बारी का इंतजार करना पड़ रहा है। बैठने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। शौचालय की सुविधा भी नहीं होने से लोगों को सड़क की ओर जाना पड़ रहा है। अब जानिए शव के साथ आए लोगों ने क्या कहा
गाजीपुर से आए मनोज ने कहा कि हम लोग दोपहर 3 बजे आए हैं लेकिन 5 बज रहा है अभी हमारा नंबर नहीं आया है। सीढ़ियों से चलकर ऊपर जाना पड़ रहा है बहुत दिक्कत हो रही है और वहां सिर्फ एक से दो लोगों का शव ही जल का रहा है। ऊपर साफ सफाई नहीं है बहुत गंदगी है।
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घाट से 15 फीट ऊपर छत पर चल रहा श्मशान-घाट:मणिकर्णिका-हरिश्चंद्र पर अंतिम संस्कार की वेटिंग, 3-4 घंटे करना पड़ रहा इंतजार