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वंदे मातरम स्मरणोत्सव कार्यक्रम में महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने कहा कि 2012 से 2017 के बीच जब वे पहली बार महापौर थे, तब नगर निगम सदन की बैठकों में वंदे मातरम गाए जाने का विरोध होता था। उस समय विरोध करने वालों को समझाया गया कि वंदे मातरम भारत माता के चरणों में नमन है। उन्होंने कहा कि आज नगर निगम की नई विशाल इमारत तैयार हो रही है और जल्द ही निगम वहां प्रवेश करेगा। खास बात यह है कि जिस सदन में कभी वंदे मातरम का विरोध होता था, उसी नए सदन का नाम ‘वंदे मातरम’ रखा गया है। यह भारत माता के प्रति सम्मान का बड़ा प्रतीक है। वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारत माता के प्रति सम्मान और नमन का भाव है। आजादी की लड़ाई के दौरान हमारे महापुरुषों और क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम गाते हुए देश के लिए संघर्ष किया और अपना बलिदान दिया। उन्होंने कहा कि भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे महापुरुषों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष किया। वंदे मातरम उस दौर में देशवासियों के अंदर राष्ट्रभक्ति और साहस का भाव जगाने वाला गीत बना। महापौर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वंदे मातरम को सम्मान देने का काम किया है। देशभक्ति और सामाजिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम का आयोजन इसके महत्व को दर्शाता है। महापौर ने कहा कि वंदे मातरम देश के अमर शहीदों के संघर्ष, बलिदान और राष्ट्रभक्ति की याद दिलाता है।
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वंदे मातरम कार्यक्रम में बोले महापौर हरिकांत अहलूवालिया:नगर निगम के जिस सदन में कभी वंदे मातरम का विरोध होता था, अब उसी का नाम वंदे मातरम