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गोंडा जिले में खरीफ सीजन के दौरान यूरिया और डीएपी की खपत में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई है पिछले वर्ष की तुलना में इस बार किसानों को 2074 मीट्रिक टन अधिक खाद वितरित की गई है। इस असामान्य वृद्धि को गंभीरता से लेते हुए आज बुधवार सुबह 10 बजे जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने गहन जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन ने जांच के लिए जिला स्तरीय अधिकारियों के नेतृत्व में कुल 16 टीमें गठित की हैं। इन टीमों से आज बुधवार शाम तक जांच रिपोर्ट तलब की गई है। शासन के नियमों के अनुसार, किसानों को प्रति हेक्टेयर एक फसल के लिए अधिकतम 5 बोरी डीएपी और 7 बोरी यूरिया देने का प्रावधान है। इसके बावजूद खरीफ-2025 के सापेक्ष खरीफ-2026 में 2074 मीट्रिक टन खाद का अतिरिक्त वितरण हुआ है। खपत में आई इस अचानक तेजी ने कालाबाजारी, जमाखोरी या अन्य अनियमितताओं की आशंका को जन्म दिया है। डीएम द्वारा गठित ये ब्लॉकवार टीमें अपने-अपने क्षेत्र में सबसे अधिक यूरिया और डीएपी खरीदने वाले शीर्ष 20-20 किसानों का स्थलीय सत्यापन करेंगी। इसमें यह जांचा जाएगा कि किसानों की जोत के अनुसार खाद की खरीद वैध थी या नहीं। टीमें संबंधित खाद विक्रेताओं और फुटकर दुकानदारों के स्टॉक का स्थलीय व अभिलेखीय (पीओएस मशीन और रजिस्टर) सत्यापन भी करेंगी। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी जांच दल प्राथमिकता के आधार पर स्थलीय निरीक्षण पूरा कर आज बुधवार शाम तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। यदि जांच में खाद की कालाबाजारी, अवैध भंडारण या निर्धारित मात्रा से अधिक वितरण में किसी भी दुकानदार या अधिकारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। जिला कृषि अधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को शाम तक सौंप दी जाएगी और पूरी गंभीरता पूर्वक जांच करके रिपोर्ट दी जाएगी।
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गोंडा में खाद की अधिक बिक्री का मामला गर्माया:16 टीमें बनाकर डीएम ने मांगी रिपोर्ट, तय मानक से 2074 मीट्रिक टन ज्यादा बेची गई