नई दिल्ली2 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों के विरोध के मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के सर्कुलर पर जवाब मांगा है। CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि छात्रों और फैकल्टी के खिलाफ किसी तरह की दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
दरअसल, NALSAR के छात्रों ने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस की मौजूदगी का विरोध किया था। इसके बाद BCI ने सभी स्टेट बार काउंसिलों को NALSAR के 2026 बैच के छात्रों का एनरोलमेंट रोकने का निर्देश दिया था। BCI ने छात्रों के विरोध की जांच के लिए यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर से रिपोर्ट भी मांगी थी।
हालांकि, कुछ ही घंटों बाद BCI ने अपना फैसला वापस ले लिया। BCI ने कहा कि उसे मिली जानकारी के मुताबिक 2026 बैच के ज्यादातर छात्र निर्दोष हैं और वे चीफ जस्टिस का अपमान करने की किसी कोशिश में शामिल नहीं थे।
CJI बोले- ‘बिल्कुल बेवजह था BCI का कदम’
सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत ने BCI के कदम पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “यह बिल्कुल बेवजह था। मैं खुद ऐसा छात्र रहा हूं जो विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से शामिल होता था। यह छात्रों और मेरे बीच की बातचीत है, BCI कौन होता है इसमें दखल देने वाला?”
CJI ने कहा कि अगर छात्र कानून के दायरे में रहकर अपनी बात रख रहे हैं तो उन्हें ऐसा करने की अनुमति होनी चाहिए। कोर्ट ने BCI से उसके सर्कुलर पर जवाब मांगा है और NALSAR के छात्रों या फैकल्टी के खिलाफ फिलहाल किसी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक की बात कही है।
