5-डे बैंकिंग की मांग पर बैंक कर्मियों का प्रदर्शन:सरकार-आईबीए के बीच सहमति के बावजूद लागू नहीं हुई व्यवस्था


5 दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने समेत विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार शाम इंडियन बैंक जोनल ऑफिस पर बैंककर्मियों ने प्रदर्शन किया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर हुए प्रदर्शन में उत्तर प्रदेश बैंक एम्प्लॉइज यूनियन (UPBEU) समेत विभिन्न बैंक यूनियनों के पदाधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए 5-डे बैंकिंग को तत्काल लागू करने की मांग की। यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि 5-डे बैंकिंग की मांग वर्ष 2014 से लंबित है। वर्ष 2018 के वेतन समझौते में भी इस मांग को शामिल किया गया था और 2024 में लिखित सहमति होने के बावजूद इसे लागू नहीं किया गया। बैंककर्मियों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों, एलआईसी समेत कई संस्थानों में पांच दिवसीय कार्य व्यवस्था लागू है, जबकि बैंककर्मी अभी भी शनिवार को काम करते हैं। यूनियन प्रतिनिधि रहमान ने कहा कि सभी बैंकों के कर्मचारी UFBU के बैनर तले इस मांग को लेकर एकजुट हैं। उन्होंने कहा कि आज का प्रदर्शन सांकेतिक है। यदि सरकार ने मांग पर जल्द फैसला नहीं लिया तो आगे आंदोलन को बड़ा रूप दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर डीएम और वित्त मंत्रालय को ज्ञापन दिया जाएगा और दिल्ली के जंतर-मंतर तक प्रदर्शन किया जा सकता है। रहमान ने कहा कि आज बैंकिंग का बड़ा हिस्सा डिजिटल हो चुका है। एटीएम, कैश मशीन, नेट बैंकिंग और यूपीआई जैसी सुविधाओं के बावजूद बैंक कर्मचारियों को शनिवार को भी काम करना पड़ रहा है। जब अन्य संस्थानों में पांच दिवसीय व्यवस्था संभव है तो बैंकिंग में इसे लागू करने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बैंक यूनियन का आंदोलन गैर-राजनीतिक है। चुनावों में बैंककर्मी सरकार के लिए ड्यूटी करते हैं और आगे भी अपनी मांगों को सरकार के सामने रखते रहेंगे। मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही। स्टेट बैंक से सचिन चौधरी ने कहा कि 5-डे बैंकिंग उनकी प्रमुख मांग है। उन्होंने बताया कि यह मांग 2014 से लंबित है और 2018 के वेतन समझौते में भी रखी गई थी। 2024 में भी इस पर लिखित सहमति हुई, लेकिन अभी तक अमल नहीं हुआ। सचिन ने कहा कि बैंककर्मी पांच कार्यदिवसों में काम के समय को जरूरत के अनुसार समायोजित करने के लिए तैयार हैं, ताकि शनिवार की छुट्टी से बैंकिंग कामकाज प्रभावित न हो। उन्होंने डिजिटल बैंकिंग का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब एटीएम, सीडीएम, नेट बैंकिंग और यूपीआई के जरिए बड़ी संख्या में काम हो रहा है तो शनिवार को छुट्टी देने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। प्रदर्शन के दौरान बैंककर्मियों ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण की नीतियों का भी विरोध किया। यूनियनों ने निजीकरण रोकने और बैंकों में रिक्त पदों पर नई भर्ती करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कर्मचारियों की कमी के बावजूद बैंकिंग सेवाओं का काम लगातार बढ़ रहा है। प्रदर्शन का नेतृत्व ललित कुमार शर्मा, अरविंद त्रिपाठी, महिपाल, रहमान, केके गौतम समेत विभिन्न बैंक यूनियन प्रतिनिधियों ने किया। कमल कुमार, आशीष कुमार, हिमानी, नारायण सिंह और हिमांशु त्यागी समेत बड़ी संख्या में बैंककर्मी मौजूद रहे। यूनियन पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से और तेज किया जाएगा।

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