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4 मिनट पहले
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जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच कर रही समिति ने तीनों आरोपों को साबित माना है। इनमें सरकारी आवास में बिना हिसाब बड़ी मात्रा में कैश मिलने, सबूत संभालने में लापरवाही और जांच के दौरान टालमटोल वाले असंतोषजनक जवाब देने के आरोप शामिल हैं।
समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली के 30, तुगलक क्रिसेंट स्थित जज के सरकारी आवास के स्टोररूम में 500 रुपए के नोटों में बड़ी मात्रा में कैश मिला था। जज कैश की मौजूदगी, उसके स्रोत और मालिकाना हक के बारे में संतोषजनक सफाई नहीं दे पाए।
समिति ने कहा कि इस आधार पर उनके खिलाफ पहला आरोप साबित होता है।
सबूत संभालने में गंभीर लापरवाही
दूसरे आरोप की जांच में समिति ने मामले से जुड़े भौतिक सबूतों को संभालने और सुरक्षित रखने में गंभीर लापरवाही पाई। रिपोर्ट के मुताबिक, स्टोररूम को कानूनी तौर पर सील करने और उसकी जांच से पहले उसकी हालत बदल दी गई थी।
समिति ने यह भी कहा कि बाद में मिले कुछ करेंसी नोटों के गायब होने या उपलब्ध नहीं होने की कोई संतोषजनक सफाई नहीं दी गई। समिति ने निष्कर्ष निकाला कि सबूतों को सही तरीके से सुरक्षित रखने में गंभीर चूक हुई।
हालांकि, रिपोर्ट में यह साबित नहीं हुआ कि गायब करेंसी नोट जज ने खुद हटाए थे।
जज के जवाब असंतोषजनक और टालमटोल वाले मिले
समिति ने तीसरे आरोप को भी साबित माना। यह आरोप जांच के दौरान जज की ओर से दिए गए जवाबों से जुड़ा था।
समिति ने खास तौर पर 22 मार्च 2025 के उनके जवाब का जिक्र किया। पैनल ने इसे असंतोषजनक और टालमटोल वाला बताया।
समिति के मुताबिक, इस जवाब में ऐसे हालात में अपेक्षित संस्थागत जिम्मेदारी और स्पष्टता नहीं थी। यह निष्कर्ष स्वतंत्र सरकारी गवाहों के बयानों और समिति के सामने रखे गए दूसरे सबूतों के आधार पर निकाला गया।
सक्षम प्राधिकारी को भेजी गई अंतिम रिपोर्ट
जांच समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सक्षम प्राधिकारी को भेज दी है। इसके साथ कार्रवाई का रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेज और सबूत भी भेजे गए हैं।
रिपोर्ट में दिए गए निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई कानून के मुताबिक की जाएगी।
