सोनभद्र में जमीन की पैमाइश को लेकर हंगामा:ग्रामीणों ने किया विरोध; जलभराव के चलते तीसरी बार भी नहीं हो सकी नाप


सोनभद्र के नगवां विकासखंड के चेरूई गांव में 7 अगस्त की दोपहर जमीन की पैमाइश को लेकर हंगामा हो गया। कानूनगो अवधेश तिवारी राजस्व टीम के साथ तीसरी बार विवादित जमीन की पैमाइश करने पहुंचे थे। ग्रामीणों के विरोध और मौके पर जलभराव के कारण टीम को बिना पैमाइश किए लौटना पड़ा। ग्रामीणों ने जमीन पर बाहरी लोगों के नाम दर्ज होने और पुराने पट्टे को लेकर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। विवादित भूमि ग्राम सभा लसड़ा निवासी श्री भगवान पाण्डेय को वर्ष 1971 में पट्टे के रूप में मिली 10 बीघा जमीन से जुड़ी है। ग्रामीणों के विरोध के बाद वर्ष 1977 में कमिश्नरी से इस पट्टे पर स्थगन आदेश जारी किया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि यह आदेश सर्वे की खतौनी में भी दर्ज है। इसके बावजूद जमीन के रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीण बोले- गांव की जमीन गांव को ही मिले
ग्रामीण रामविलास यादव ने कहा कि यह गांव का अकेला मामला नहीं है। ग्रामीण चंदा जुटाकर लंबे समय से इस मामले की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनका आरोप है कि गांव की जमीन बाहरी लोगों के नाम दर्ज कर दी गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पट्टा स्थगित था, तो खतौनी में नाम कैसे दर्ज हो गया। ग्रामीणों ने पूरे मामले की जांच की मांग की है। रामविलास यादव के मुताबिक, गांव की करीब 200 बीघा जमीन बाहरी लोगों के नाम दर्ज है। इस जमीन पर आदिवासी परिवारों के घर और खेत भी मौजूद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जमीन के रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए। पहले भी पैमाइश के लिए पहुंची थी राजस्व टीम
ग्रामवासी विद्यासागर ने बताया कि मामला समाज कल्याण मंत्री संजीव गोंड, जिलाधिकारी और एसडीएम के संज्ञान में है। उनके मुताबिक, इससे पहले भी कानूनगो और लेखपाल पैमाइश के लिए पहुंचे थे, लेकिन ग्रामीणों के विरोध के कारण प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी थी। इस बार भी ग्रामीणों के विरोध के चलते पैमाइश नहीं हो सकी। ग्रामीणों ने उठाया कोर्ट में मामला लंबित होने का सवाल
हरिजन बस्ती की सोमरी आदिवासी सुदर्शन चेरो ने कहा कि जब मामला न्यायालय में लंबित है, तो जमीन की पैमाइश कराने की इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उन्हें यहां से हटाती है, तो उनके पुनर्वास की व्यवस्था भी होनी चाहिए। ग्रामीणों ने राजस्व विभाग से मामले की पूरी जांच कर न्यायोचित कार्रवाई की मांग की है।

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