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गोरखपुर में तैनात दो सिपाहियों ने अपने करतूतों से शहर और पुलिस विभाग को शर्मशार कर दिया। दोनों 2018 बैच क हैं और गाजीपुर के रहने वाले हैं। एक सिपाही अभिषेक यादव ने जिला अस्पताल से 10 साल की बच्ची को किडनैप कर उसके साथ रेप किया। उसके बाद हत्या कर लाश नदी में फेंक दी। वहीं दूसरे सिपाही शशिकांत यादव ने पंजाब और दिल्ली के तीन गैंगस्टर सहित 22 लोगों के फर्जी पते से पासपोर्ट बनवाएं। हाल ही में पुलिस जांच में इसका खुलासा हुआ। फिलहाल दोनों सिपाही जेल में बंद हैं। पुलिस उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई में जुटी है। दोनों मामले को विस्तार से समझिए …
आरोपी 1- सिपाही अभिषेक ने बच्ची के साथ रेपकर हत्या किया
28 जुलाई की रात करीब 8 : 30 बजे 10 साल की एक बच्ची गोरखपुर के जिला अस्पताल में भर्ती अपनी बड़ी बहन को खाना देने आई। रात 10 बजे के करीब खाना खिलाकर घर के लिए निकली। बहुत देर तक जब घर नहीं पहुंची तो परिजनों की चिंता बढ़ गई। आजमगढ़ के रहने वाले पिता तलाश के लिए हॉस्पिटल पहुंचे। पूरे परिसर और बाहर के हर संभावित जगहों पर पूछताछ की। लेकिन बच्ची का कहीं पता नहीं चला। उसके बाद पिता ने पुलिस को इसकी सूचना दी। तहरीर में बताया कि हॉस्पिटल के CCTV कैमरे में एक पुलिस वाला उसे अपने साथ बाइक पर बैठाकर कहीं ले जाता हुआ दिखाई दिया।
घर छोड़ने के बहाने बाइक पर बैठाया
वहीं बड़ी बहन ने बताया कि वह जब हम बाहर बैठकर खाना खा रहे थे तभी एक वर्दी पहने हुए व्यक्ति आया और हमने नाम पता पूछने लगा। फिर पूछा कि कोई घर चलेगा, चलों मैं छोड़ देता हूं। हमने मना कर दिया। लेकिन वह मेरी बहन के पीछे पड़ गया था। पानी लेने गई तब भी उसके पीछे- पीछे गया था। जब वह घर के लिए निकली तो रास्ते में उसे रोक कर कुछ बात किया उसके बाद बाइक पर बैठाकर कहीं लेके चला गया। बच्ची की तलाश में पुलिस की 10 टीमें लगी
29 जुलाई को कोतवाली थाने में FIR दर्ज हुई। जिसके बाद पुलिस की 10 टीमें बच्ची की तलाश में जुट गई। CCTV कैमरे की मदद से आरोपी सिपाही की पहचान की गई। उसके गाड़ी के नंबर से उसे पकड़ लिया गया। कड़ाई से पूछताछ में जुर्म कुबूल किया
पुलिस की कड़ाई से पूछताछ में उसने बच्ची के साथ रेप कर हत्या की बात कुबूल कर ली। उसने बताया कि लाश कहीं छिपा दिया है। 30 जुलाई को कोतवाली पुलिस आरोपी को अपने साथ घटना स्थल लेकर गई और 36 घंटे बाद नदी से लाश बरामद किया। श्मशान घाट पर की हैवानियत
आरोपी की पहचान गाजीपुर के रहने वाले 35 साल के अभिषेक यादव के रूप में हुई। जांच में सामने आया कि सिपाही बच्ची को जिला अस्पताल से 15 किलोमीटर दूर श्मशान घाट ले गया था। जहां पहले रेप किया और फिर मारकर नदी में फेंक दिया। बच्ची की शव बरामद होने के बाद परिजनों में चीख-पुकार मच गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उसके प्राइवेट पार्ट पर चोट और गर्दन की हड्डी टूटी हुई बात सामने आई। राजघाट पर पुलिस की मौजूदगी में उसका अंतिम संस्कार किया गया। आरोपी से पूछताछ और आगे की कार्रवाई जारी
फिलहाल आरोपी सिपाही पुलिस की गिरफ्त में है। मंगलवार को पुलिस ने उसे 8 घंटे की रिमांड पर रखा था। इस मामले में लगातार कार्रवाई चल रही है। आरोपी की एक 13 साल की बेटी और 7 साल का बेटा भी है। जो पत्नी के साथ के गाजीपुर में रहते हैं। बंगाल की महिला से भी किया छेड़छाड़
जनवरी, 2025 में उसने बंगाल की एक महिला से छेड़छाड़ की थी। तब भी उसे सस्पेंड किया गया था। जेल भी भेजा गया था। सितंबर, 2025 में उसकी बहाली हुई थी। उस पर पॉक्सो एक्ट में FIR दर्ज की गई है। रासुका (एनएसए) भी लगाया जाएगा। आरोपी 2- पंजाब के गैंगेस्टर का गोरखपुर के पते से बनाया फर्जी पासपोर्ट 20 जुलाई को पंजाब के मोस्ट वांटेड गैंगस्टर जोबनजीत उर्फ़ बिल्ला को इंडोनेशिया के जकार्ता एयरपोर्ट ने गिरफ्तार कर लिया गया। पंजाब पुलिस उसे मुंबई लेकर आई जांच में सामने आया कि उसने गोरखपुर के फर्जी पते से पासपोर्ट बनवाया था। इसी पासपोर्ट के जरिए वह जनवरी 2025 में भारत छोड़कर फरार हो गया था। उसकी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां और पुलिस ने फर्जी पासपोर्ट बनाने में संलिप्त लोगों की जांच शुरू कर दी। इस मामले में जांच को आगे बढ़ाते हुए 30 जुलाई को गोरखनाथ पुलिस ने जीआरपी के एक दीवान शशिकांत यादव को हिरासत में लिया। संबंधित पुलिसकर्मी साल 2024 में गोरखनाथ थाने में तैनात था। पुलिस के मुताबिक 2023 में उसकी ज्वाइनिंग हुई थी। तबसे डेढ़ साल के अंदर नेटवर्क खड़ा कर लिया। गोरखनाथ थाने में तैनाती के दौरान कुल 45 लोगों के पासपोर्ट बनाए गए थे। जिसमें 22 के फर्जी होने की पुष्टि हुई है। आरोपी ने इन सभी के फर्जी नाम और पते का सत्यापन किया था। गाजीपुर का रहने वाला है आरोपी
पुलिस के अनुसार आरोपी ने जिस व्यक्ति के माध्यम से फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर पासपोर्ट का सत्यापन किया था, उसकी तलाश चल रही है। गिरफ्तार सिपाही शशिकांत यादव गाजीपुर जिले के लोनहरा स्थित नसीरपुर कुसुम गांव का रहने वाला है। वर्तमान में उसकी तैनाती गोरखपुर जीआरपी अनुभाग कार्यालय में सीओ पेशी बलिया में थी। जांच में सामने आया कि इंडोनेशिया से डिपोर्ट किया गया पंजाब के अमृतसर स्थित मेहता थाने के अर्जनमंगा के रहने वाले गैंगस्टर जोबनजीत सिंह उर्फ बिल्ला ने दीपू सिंह पुत्र संदीप सिंह के नाम से लच्छीपुर, भगवती चौराहा के पते पर फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर पासपोर्ट बनवाया था। दो और अपराधियों के पासपोर्ट बनवाएं
इसी फर्जी पासपोर्ट के सहारे वह विदेश भाग गया था। उसके इंडोनेशिया से डिपोर्ट होने के बाद पूरा मामला सामने आया। पुलिस जांच में दो अन्य अपराधियों के नाम भी सामने आए हैं। दयाल मल्ल पुत्र साहबजादा, निवासी मकान संख्या-722-बी, रामनगर कालोनी, वार्ड संख्या-20, लच्छीपुर, गोरखनाथ के नाम से भी साल 2024 में फर्जी पासपोर्ट बनाया गया। वह मूल रूप से अमृतसर (पंजाब) का रहने वाला है और बाद में दिल्ली एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया। इसी तरह हरसिमरन सिंह उर्फ बादल पुत्र हरविंदर सिंह, निवासी 1/103-ए, शालीमार बाग, दिल्ली ने राजेश सिंह के नाम से लच्छीपुर के पते पर साल 2024 में फर्जी पासपोर्ट बनवाया था। उसे दिसंबर 2025 में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया था। 2025 में निलंबित कर पुलिस लाइन भेजा गया
पुलिस के अनुसार शशिकांत यादव की अगस्त 2023 में गोरखनाथ थाने पर तैनाती हुई थी। करीब डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में उसने फर्जी पासपोर्ट बनवाने का नेटवर्क खड़ा कर लिया। फरवरी 2025 में उसे निलंबित कर पुलिस लाइन भेजा गया, जहां से लगभग छह महीने पहले उसका स्थानांतरण जीआरपी में हुआ था। वह भी 2018 बैच का सिपाही है।
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2018 बैच के दो सिपाहियों ने गोरखपुर को किया शर्मशार:एक ने बच्ची के साथ की हैवानियत, दूसरे ने गैंगस्टर की फर्जी पासपोर्ट बनाई