स्पोर्ट्स बिजनेस का बदला ट्रेंड…:स्पॉन्सरशिप की जगह टीमों में हिस्सेदारी खरीदने पर फोकस बढ़ा


एशियाई रईस परिवारों और बड़े निवेशकों का खेलों के प्रति नजरिया अब तेजी से बदल रहा है। पहले वे सिर्फ टीमों की जर्सी पर अपना नाम छपवाने (स्पॉन्सरशिप) या चैरिटी आयोजनों तक सीमित रहते थे, लेकिन अब वे सीधे स्पोर्ट्स फ्रेंचाइजी, लीग और खेलों से जुड़ी तकनीक में अपनी हिस्सेदारी खरीद रहे हैं। निवेशकों को पूरा भरोसा है कि दर्शकों की लगातार बढ़ती संख्या और टीवी-डिजिटल राइट्स की आसमान छूती कीमतों से उन्हें लंबे समय में बहुत बड़ा मुनाफा मिलेगा। इस नए ट्रेंड की वजह से खेल जगत में निवेश के पुराने सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं। नए आंकड़ों के मुताबिक, इस साल 13 जुलाई तक एशिया-प्रशांत क्षेत्र में स्पोर्ट्स से जुड़ी डील 3.69 बिलियन डॉलर (करीब 35 हजार करोड़ रुपए) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। यह 1980 के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है और पिछले साल के मुकाबले 12 गुना ज्यादा है। चूंकि किसी भी टीम का पूरा मालिकाना हक खरीदना बहुत महंगा और मुश्किल होता है, इसलिए ज्यादातर अमीर परिवार और निवेशक टीमों में थोड़ी हिस्सेदारी (माइनॉरिटी स्टेक) खरीदने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। भारत में इस बड़े बदलाव का सबसे सीधा असर इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में देखने को मिल रहा है, जहां टीमों की कीमत लगातार आसमान छू रही है। सूत्रों के मुताबिक, लखनऊ सुपर जायंट्स की मालिक गोयनका फैमिली करीब 19 हजार करोड़ रुपए की वैल्यूएशन पर अपनी 5 से 10 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने पर विचार कर रही है और विदेशी निवेशकों ने इसमें काफी दिलचस्पी दिखाई है। इसी तरह, इस साल की शुरुआत में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और राजस्थान रॉयल्स जैसी टीमों में हिस्सेदारी को लेकर भी बड़ी डील हो चुकी हैं। खेल जगत में हो रहे इस भारी निवेश के पीछे एक बड़ा कारण यह भी है कि बड़े बैंक और निवेशक इसे ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ प्रूफ बिजनेस मान रहे हैं। इसका मतलब है कि तकनीक के बदलने या शेयर बाजार में मंदी आने का लाइव खेलों के रोमांच पर कोई खास असर नहीं पड़ता। स्पेनिश फुटबॉल क्लब वालेंसिया के मालिक किआट लिम का साफ मानना है कि आज के समय में दर्शकों का ध्यान ही सबसे कीमती चीज है। जितने ज्यादा लोग मैच देखेंगे, ब्रॉडकास्टर्स उतने ही ज्यादा पैसे देंगे, जिसका सीधा फायदा टीमों और उनमें पैसा लगाने वालों को मिलेगा। जानकारों का कहना है कि अब खेलों में पैसा लगाना सिर्फ अरबपतियों का शौक नहीं रह गया है, बल्कि यह मुनाफा कमाने की एक बेहद ठोस और सोची-समझी बिजनेस रणनीति बन चुका है। स्पोर्ट्स बिजनेस के निवेशक क्रिकेट के अलावा, अब जापान और दक्षिण कोरिया में बेसबॉल के साथ-साथ फॉर्मूला वन और यूरोपीय फुटबॉल में भी निवेश के नए मौके तलाश रहे हैं।

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