Punjab University Chandigarh Jyoti Death Case

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यह बात चंड़ीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी (PU) में 28 जुलाई को जान गंवाने वाली हरियाणा की ज्योति (26) के चाचा जतिंदर ने कही। जतिंदर ने कहा कि सुबह करीब 10 बजे PU प्रशासन की ओर से ज्योति के पिता रविंद्र को फोन पर कॉल आई थी।

फोन करने वाले ने कहा कि उनकी बेटी को करंट लग गया है और उसकी मौत हो गई है, आप जल्दी आ जाइए, लेकिन हम कैसे मान लें कि यह करंट से हुई मौत है? हमने PU प्रशासन से कहा कि कैंपस इतना बड़ा है, वहां कहीं कैमरे लगे होंगे?

कोई ऐसा सबूत दिखा दो, जिससे हमें भी लगे उसकी मौत करंट लगने से हुई है। क्योंकि उसके शरीर पर कोई निशान ही नहीं है। उन्होंने कहा कि जब तक हमारे सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक हम शव नहीं लेंगे। जहां हादसा हुआ है, वहां से करीब 50 मीटर दूरी पर सिक्योरिटी गार्ड बैठते हैं, लेकिन किसी ने मदद नहीं की।

पीयू में देर रात तक मीटिंग का दौर चला। इसके बाद परिजन ने PU प्रशासन के साथ समझौता कर लिया। 21 लाख रुपए मुआवजा और मृतका के भाई को PU में नौकरी पर बात बनी है। आज शव का पोस्टमॉर्टम होगा।

आखिर कैसे हुई ज्योति की मौत? मदद के लिए सबसे पहले कौन पहुंचा? घटनास्थल की जांच में क्या-क्या सामने आया? जानने के लिए पढ़ें ग्राउंड रिपोर्ट…

हादसे वाली जगह पर कई बिजली जंक्शन बॉक्स लगे हैं।

हादसे वाली जगह पर कई बिजली जंक्शन बॉक्स लगे हैं।

पहले जानिए हादसा कहां हुआ, करंट कैसे आया

हरियाणा के महेंद्रगढ़ की ज्योति PU के साउथ कैंपस के हॉस्टल नंबर- 10 में रहती थी। वह सुबह के वक्त होस्टल नंबर-8 के पास होते हुए कहीं जा रही थी। इस हॉस्टल के दो गेट हैं- एक आगे और दूसर पीछे। जहां हादसा हुआ है वह जगह आगे वाले गेट से करीब 50 मीटर दूर है, यहां पर सिक्योरिटी गार्ड भी बैठते हैं। जबकि पीछे वाला गेट हादसे वाली जगह से सिर्फ 15 मीटर दूर है, हालांकि यहां पर सिक्योरिटी गार्ड तैनात नहीं रहते हैं।

सुबह के वक्त तेज बारिश हो रही थी, जिससे सड़क पर करीब आधा फीट पानी भरा हुआ था। जिससे ज्योति सड़क की बजाय फुटपाथ से होकर जा रही थी। जब वह हॉस्टल नंबर-8 के पीछे वाले गेट से 15 मीटर पास पहुंची, तो यहां पर फुटपाथ पर एक मोटी केबल डली हुई थी।

हादसे वाली जगह की जांच टीम से जुड़े सूत्रों के अनुसार, यहां पर जंक्शन बॉक्स लगे हुए हैं और केबल भी फैली हुई हैं। इन्हीं में से एक केबल में कट था और बारिश की नमी के कारण केबल में स्पार्किंग हुई, जिससे फुटपाथ पर करंट फैल गया। जब वहां से ज्योति निकली तो करंट लग गया।

हालांकि ज्योति के परिजन जब पीयू पहुंचने वाले थे, तो उससे ठीक पहले पीयू का स्टाफ वहां पहुंच गया। सभी जंक्शन बॉक्स बंद किए गए और वहां बैरिकेड भी लगा दिए गए। इससे पहले वहां से लोग भी गुजर जरते रहे।

पिता बस ड्राइवर, बेटी ने स्कालरशिप से पढ़ाई की

चाचा जतिंदर ने बताया कि ज्योति शुरू से ही पढ़ने में काफी होशियार थी। उसके पिता रविंद्र एक स्कूल में बस ड्राइवर हैं। उन्हें हर महीने साढ़े 12 हजार रुपए मिलते हैं। इससे तो घर का खर्च भी बड़ी मुश्किल से चलता है। वह माइक्रोबायोलॉजी में पीएचडी कर रही थी। उसे स्कॉलरशिप मिल रही थी, जिसके दम पर वह पढ़ रही थी।

वहीं, परिवार को उम्मीद थी कि जल्दी ही उसे अच्छी नौकरी मिल जाएगी, जिससे परिवार के दिन बदल जाएंगे। लेकिन अब किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि ऐसा भी हो सकता है। परिवार में उसका एक छोटा भाई भी है।

ज्योति की मदद करने वाले वंशराज ने कहा कि वह साइकिल से जा रहे थे, तभी देखा कि लड़की सड़क किनारे गिर पड़ी है।

ज्योति की मदद करने वाले वंशराज ने कहा कि वह साइकिल से जा रहे थे, तभी देखा कि लड़की सड़क किनारे गिर पड़ी है।

पहले बैग फिर हॉकी की मदद से निकाला

करंट लगने के तुरंत बाद ज्योति की मदद करने वाले वंशराज ने बताया कि घटना सुबह 9 से 10 बजे के बीच की है। वह साइकिल पर जा रहे थे। उस समय बारिश हो रही थी। लड़की वहां (फुटपाथ की तरफ इशारा करते हुए) से आई थी। वह पानी में गिरी हुई थी। इसके बाद मैंने साइकिल रोकी और उसकी मदद के लिए आगे आया।

पहले उसका बैग पकड़कर निकालने की कोशिश की, लेकिन बैग की तनी टूट गई। फिर वहां हॉकी स्टिक लेकर जा रहे एक लड़के से हॉकी ली और उसकी मदद से लड़की को पानी से निकालने की कोशिश की। हालांकि तब तक वह बेसुध हो चुकी थी। इसके बाद उसे साइड में ले गया और उसके पैरों की मालिश की। लोग जुट गए। इतने में एंबुलेंस आ गई, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया।

ज्योति बहुत चिल्लाई, लेकिन मदद नहीं मिली

हॉस्टल के बाद धरने पर बैठी छात्राओं ने कहा कि करंट लगने के बाद ज्योति करीब एक से दो मिनट तक चिल्लाती रही, लेकिन उसकी मदद के लिए PU का कोई भी स्टाफ सामने नहीं आया। घटना स्थल से 100 मीटर से भी कम दूरी पर स्कूल है, लेकिन वहां से भी कोई नहीं आया।

योगा-डे का मैसेज आता है, मौत की खबर नहीं

छात्राओं ने कहा कि योगा-डे, पर्यावरण दिवस या पौधारोपण हो, हर कार्यक्रम का मैसेज वॉट्सएप ग्रुप में आता है। कहा जाता है कि अगर आप इसमें शामिल नहीं होंगे तो आपको यहां से निकाल दिया जाएगा। लेकिन आज लड़की की मौत हो गई, फिर भी किसी भी वार्डन का मैसेज नहीं आया कि ऐसी घटना हुई है, आप वहां न जाएं।

छात्राओं ने आरोप लगाया कि सिक्योरिटी स्टाफ क्या कर रहा था। एक छात्रा दीपिका ने बताया कि हॉस्टलों के वाटर कूलरों का भी बुरा हाल है। उनमें भी करंट आ जाता है। पता नहीं किस समय बड़ा हादसा हो जाए।

छात्रा ने कहा कि पूरी यूनिवर्सिटी में बिजली के जंक्शन बॉक्स की जांच हो और पेड़ों की छंटाई तुरंत कराई जाए।

छात्रा ने कहा कि पूरी यूनिवर्सिटी में बिजली के जंक्शन बॉक्स की जांच हो और पेड़ों की छंटाई तुरंत कराई जाए।

छात्र नेता बोले- परिवार को मुआवजा दिया

पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र नेता सारा ने कहा- हमने वीसी को मांग पत्र दिया है। हमने साफ कहा है कि इस घटना के लिए एक्सईएन ऑफिस के जिम्मेदार लोग तुरंत इस्तीफा दें। उन पर लापरवाही का केस दर्ज किया जाए। परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।

पूरी यूनिवर्सिटी में बिजली के जंक्शन बॉक्स की जांच हो और पेड़ों की छंटाई तुरंत कराई जाए। इसके साथ ही हमने मांग रखी है कि साउथ कैंपस में एक स्थायी हेल्थ सेंटर बनाया जाए और 24 घंटे एंबुलेंस तैनात की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति न बने।

डीएसडब्ल्यू बोलीं- विशेषज्ञों से राय ले रहे

पंजाब यूनिवर्सिटी की डीएसडब्ल्यू (वीमेन) – प्रो. नमिता गुप्ता ने कहा कि हम इस मामले में तकनीकी विशेषज्ञों से राय ले रहे हैं। वे साइट विजिट कर रहे हैं। भविष्य में इस तरह की घटना न हो, इस पर काम किया जा रहा है।

बच्चे की भरपाई तो कर पाना मुश्किल है, लेकिन यूनिवर्सिटी अपनी तरफ से प्रयास कर रही है। छात्रों की कमेटी बनाई गई है। उनकी सभी मांगों पर विचार किया जाएगा। बाकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मौत की वजह साफ हो जाएगी।

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