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शामली के झिंझाना थाना क्षेत्र के तिसंग गांव में गुरुवार को हरियाणा पुलिस की टीम को उस समय बैरंग लौटना पड़ा, जब नारकोटिक्स मामले में वांछित आरोपी की तलाश के दौरान ग्रामीणों ने कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सही पहचान और कानूनी प्रक्रिया का पालन न किए जाने का आरोप लगाया। जानकारी के अनुसार, हरियाणा के मधुबन थाना क्षेत्र की पुलिस टीम एक नारकोटिक्स मामले में वांछित आरोपी की तलाश में तिसंग गांव पहुंची थी। पुलिस जिस व्यक्ति की तलाश कर रही थी, उसके परिजनों ने दावा किया कि उनके परिवार में ‘मोनू पुत्र ताजा’ नाम का कोई व्यक्ति नहीं है। उनका कहना था कि उनके बेटे का नाम शादाब पुत्र शौकत है और पुलिस बिना पर्याप्त सत्यापन के उनके घर पर दबिश देने पहुंच गई। ग्रामीणों का आरोप है कि हरियाणा पुलिस ने कार्रवाई से पहले स्थानीय झिंझाना थाने को सूचना नहीं दी और न ही आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कीं। इसी बात को लेकर गांव के लोग एकत्र हो गए और पुलिस कार्रवाई का विरोध करने लगे। विरोध बढ़ने पर पुलिस टीम बिना किसी गिरफ्तारी के वापस लौट गई। 2023 की घटना का भी किया जिक्र विरोध के दौरान ग्रामीणों ने वर्ष 2023 में गांव केरटू में हुई एक विवादित घटना का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि उस समय हरियाणा की सीआईए करनाल टीम वांछित आरोपी जबरदीन की गिरफ्तारी के लिए गांव पहुंची थी। आरोप था कि टीम ने स्थानीय थाने में आमद दर्ज नहीं कराई थी और पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में होने के कारण ग्रामीण उन्हें संदिग्ध समझ बैठे थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद और मारपीट हुई थी। उस मामले में दो दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था और कई लोगों को जेल भी जाना पड़ा था। इस मामले में हरियाणा पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, झिंझाना थाना प्रभारी वीरेंद्र कुमार कसाना ने बताया कि हरियाणा पुलिस जिस आरोपी की तलाश में आई थी, वह वांछित है, लेकिन पुलिस के हाथ नहीं लग सका। मामले में आवश्यक जानकारी जुटाई जा रही है।
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आरोपी की तलाश में पहुंची पुलिस शामली से लौटी बैरंग:हरियाणा पुलिस का ग्रामीणों ने किया विरोध, सिविल ड्रेस में होने के कारण संदिग्ध समझे