काशी में बिना मौसम अलर्ट के हुई बारिश:तीन दिन बाद तापमान में 4 डिग्री की छलांग,गंगा का जलस्तर बढ़ा


काशी में मानसून का मिजाज लगातार बदल रहा है। मौसम विभाग की ओर से 25 जुलाई तक किसी प्रकार का बारिश का अलर्ट जारी नहीं किए जाने के बावजूद शहर में पिछले 24 घंटे के दौरान 10.4 से 11 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके साथ ही तीन दिन बाद अधिकतम तापमान में एक ही दिन में करीब 4 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई। गुरुवार को वाराणसी में धूप, बादल, बारिश और तेज हवाओं का मिला-जुला असर देखने को मिला, जिससे पूरे दिन मौसम का स्वरूप बदलता रहा। बिना अलर्ट हुई बारिश, फिर बढ़ा तापमान गुरुवार को वाराणसी का अधिकतम तापमान 31 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा की गति लगभग 8 किलोमीटर प्रति घंटा रही, जबकि वातावरण में 70 प्रतिशत नमी बनी रही। आसमान में हल्के बादल छाए रहे और बीच-बीच में धूप निकलने के साथ हल्की बारिश तथा तेज हवाएं चलती रहीं। मौसम में आए इस अचानक बदलाव ने लोगों को उमस और राहत, दोनों का अनुभव कराया। हालांकि मौसम विभाग ने 25 जुलाई तक किसी बड़े वर्षा अलर्ट की घोषणा नहीं की थी, लेकिन इसके बावजूद शहर में बारिश दर्ज की गई। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मानसूनी प्रणाली में लगातार बदलाव के कारण स्थानीय स्तर पर ऐसे हालात बन रहे हैं। गंगा का जलस्तर फिर बढ़ने लगा लगातार हो रही बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से पानी आने के कारण गंगा का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने लगा है। गुरुवार को गंगा का जलस्तर 60.97 मीटर दर्ज किया गया। बढ़ते जलस्तर की वजह से घाट किनारे स्थित 50 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर जलमग्न हो चुके हैं। हालांकि अभी प्रमुख घाटों का संपर्क पूरी तरह नहीं टूटा है और श्रद्धालुओं तथा स्थानीय लोगों की आवाजाही जारी है। प्रशासन लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए है। 25 जुलाई तक कमजोर रहेगा मानसून यूपी आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अतुल कुमार सिंह के अनुसार मानसून की द्रोणी लगातार दक्षिण की ओर खिसक रही है। इसके चलते मानसूनी सक्रियता का मुख्य क्षेत्र पश्चिम और मध्य भारत की ओर स्थानांतरित हो गया है। इसका असर उत्तर प्रदेश पर भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने बताया कि 25 जुलाई तक प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रह सकती हैं। इस दौरान कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है, लेकिन फिलहाल किसी प्रकार की मौसम चेतावनी जारी नहीं की गई है। हालांकि 26 जुलाई के बाद मानसूनी गतिविधियों में फिर तेजी आने के संकेत हैं। खेती पर असर: किसानों के लिए मिला-जुला मौसम मौसम में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव का असर कृषि कार्यों पर भी पड़ रहा है। धान की रोपाई कर चुके किसानों के लिए हल्की बारिश लाभदायक साबित हो सकती है, क्योंकि इससे खेतों में नमी बनी रहेगी और सिंचाई की आवश्यकता कम होगी। हालांकि लगातार तेज धूप और फिर अचानक बारिश होने से खेतों में जलभराव और नमी के असंतुलन की स्थिति भी बन सकती है। विशेषज्ञ किसानों को खेतों से अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं ताकि फसल की जड़ों को नुकसान न पहुंचे। वहीं सब्जी उत्पादक किसानों के लिए यह मौसम चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। अधिक नमी के कारण बैंगन, मिर्च, टमाटर, लौकी, भिंडी और अन्य सब्जियों में फफूंद एवं कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को नियमित रूप से फसलों की निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर कृषि विभाग की सलाह के अनुसार पौध संरक्षण उपाय अपनाने की सलाह दी है।

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