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कानपुर देहात के रूरा थाना क्षेत्र के भौंरा गांव की रहने वाली मालती देवी पिछले 10 वर्षों से अपनी जमीन बचाने और न्याय पाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। इस मामले ने जिले की पुलिस और प्रशासन की जनसुनवाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मालती देवी का कहना है कि सरकारी बंटवारे के बाद प्रशासन ने लेखपाल, कानूनगो और एसडीएम की मौजूदगी में पैमाइश कराकर उन्हें जमीन पर कब्जा दिलाया था। खेत की मेड़बंदी भी कराई गई थी। लेकिन अधिकारियों के जाते ही उनके देवर भगवानदास और उनकी पत्नी ने मेड़ तोड़कर फिर से जमीन पर कब्जा करने की कोशिश शुरू कर दी। बुवाई के दौरान मारपीट और धमकी का आरोप महिला का आरोप है कि 20 जुलाई को जब वह अपने खेत में बाजरे की बुवाई कराने पहुंचीं तो आरोपियों ने गाली-गलौज की, मारपीट का प्रयास किया और मेड़ तोड़ दी। विरोध करने पर उन्हें धक्का देकर गिरा दिया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। शोर सुनकर ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो आरोपी वहां से भाग गए। थाने में शिकायत, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई मालती देवी ने घटना की शिकायत रूरा थाने में की। उनका आरोप है कि पुलिस न तो मौके पर जांच करने पहुंची और न ही उनकी शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया। कार्रवाई न होने पर वह इंसाफ की उम्मीद लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचीं। एसपी से भी नहीं हो सकी मुलाकात पीड़िता का कहना है कि उन्हें पुलिस अधीक्षक से मिलने तक नहीं दिया गया। बाहर मौजूद पुलिसकर्मियों ने केवल उनका शिकायती पत्र लिया और उन्हें वापस भेज दिया। महिला का कहना है कि जब थाने से लेकर एसपी कार्यालय तक उनकी सुनवाई नहीं हो रही है, तो उन्हें न्याय आखिर कहां से मिलेगा। जनसुनवाई व्यवस्था पर उठे सवाल इस मामले के बाद जिले की जनसुनवाई व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि फरियादी अपनी बात जिले के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी तक भी नहीं पहुंचा पा रहे हैं, तो शिकायतों का निष्पक्ष समाधान कैसे होगा। पीड़िता अब मामले में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग कर रही हैं।
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10 साल से जमीन के लिए भटक रही महिला:थाने से लेकर एसपी ऑफिस तक लगाई गुहार, बोली- कहीं नहीं मिल रहा इंसाफ