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वर्ष 2008 के चर्चित छात्रवृत्ति घोटाले का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) ने मामले में कार्रवाई करते हुए मंगलवार को एक निजी विद्यालय के प्रबंधक को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद करीब 18 साल पुराने इस प्रकरण की जांच फिर चर्चा में है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2008 में कक्षा 1 से 10 तक के छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति नकद वितरित की जाती थी। आरोप है कि इसी व्यवस्था का लाभ उठाकर जिले के 27 विद्यालयों के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों ने छात्रवृत्ति वितरण में अनियमितताएं कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया। मामला सामने आने के बाद संबंधित विद्यालयों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। जांच के दौरान सामने आया कि जिन 27 विद्यालयों के नाम जांच में शामिल थे, उनमें से अधिकांश अब अस्तित्व में नहीं हैं। करीब 10 महीने पहले आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन ने जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को पत्र भेजकर इन विद्यालयों के तत्कालीन प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों के नाम, पते और मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने को कहा था। इसके बाद शिक्षा विभाग ने जिला स्तर पर जांच कराई, लेकिन न तो संबंधित विद्यालय धरातल पर मिले और न ही उनके तत्कालीन प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों का कोई पता चल सका। मोबाइल नंबर और अन्य संपर्क संबंधी जानकारी भी उपलब्ध नहीं हो सकी। विभाग ने यही रिपोर्ट आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन को भेज दी। इसी जांच के क्रम में मंगलवार को आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन ने संत बीडीएस पब्लिक स्कूल, मानिकपुर मोड़ के प्रबंधक लाल सिंह, निवासी बेसरमऊ रोड, को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। जिला विद्यालय निरीक्षक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि संगठन ने सितंबर में संबंधित विद्यालयों और उनके प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों की जानकारी मांगी थी। विभागीय जांच में कोई भी विद्यालय संचालित नहीं मिला और न ही संबंधित लोगों का पता चल सका। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर पूरी रिपोर्ट आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन को भेज दी गई थी। अब संगठन अपनी जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रहा है।
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छात्रवृत्ति घोटाले में स्कूल प्रबंधक गिरफ्तार:इटावा में 18 साल पुराने मामले में EOW ने लिया एक्शन