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शामली के लिसाढ़ और आसपास के इलाकों में तीन तेंदुओं की मौजूदगी से ग्रामीणों में भय का माहौल है। गन्ने के खेतों में लगातार तेंदुओं के दिखाई देने और एक ग्रामीण पर हमले की घटना के बाद किसान अब अकेले खेतों में जाने से बच रहे हैं। ग्रामीण सुरक्षा के लिए लाठी-डंडों के साथ समूह बनाकर खेतों की ओर जा रहे हैं। वहीं, वन विभाग की कार्यशैली को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है। कुछ दिन पहले, लिसाढ़ के मजरा हसनपुर में अशोक नामक ग्रामीण पर एक जंगली जानवर ने हमला कर दिया था। परिजनों ने हमलावर को तेंदुआ बताया। इसके बाद हसनपुर स्थित गौशाला के सीसीटीवी कैमरों में एक साथ तीन तेंदुए कैद होने से इलाके में उनकी मौजूदगी की पुष्टि हो गई। मंगलवार सुबह, लिसाढ़ निवासी किसान नरेंद्र मलिक अपने गन्ने के खेत पर पहुंचे तो उन्हें वहां एक तेंदुआ दिखाई दिया। तेंदुए को देखते ही उन्होंने खेत में जाने के बजाय तुरंत घर लौटकर अन्य ग्रामीणों को इसकी सूचना दी। इस घटना के बाद पूरे गांव में दहशत फैल गई और किसानों ने अकेले खेतों में जाना बंद कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि गन्ने के घने खेत तेंदुओं के छिपने के लिए सुरक्षित स्थान बन गए हैं। ऐसे में खेतों में काम करने वाले किसानों और मवेशी चराने वाले लोगों पर खतरा लगातार बना हुआ है। कई ग्रामीण अब सुबह-शाम टोली बनाकर ही खेतों में जा रहे हैं।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सूचना देने के बावजूद वन विभाग की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। न तो तेंदुओं को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए गए हैं और न ही प्रभावित क्षेत्र में व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया है। इससे लोगों में विभाग के प्रति रोष बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और वन विभाग से तत्काल पिंजरे लगाकर तेंदुओं को सुरक्षित पकड़ने, प्रभावित क्षेत्र में नियमित गश्त कराने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता।
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शामली में तीन तेंदुओं की दस्तक से दहशत:ग्रुप बनाकर खेतों में जा रहे किसान, वन विभाग पर लापरवाही का आरोप