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प्रदेश में परिवहन विभाग की प्रस्तावित ऑटो अप्रूवल व्यवस्था लागू होने से पहले ही उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राजधानी के ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ में ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें तीन वाहनों का टैक्स जमा किए बिना ही उनका ऑनलाइन पंजीकरण कर दिया गया। मामला उजागर होने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया और संबंधित पंजीकरण निरस्त कराने के लिए अपर परिवहन आयुक्त (आईटी) को पत्र भेजा गया है। परिवहन कर्मचारी इसे ऑटो अप्रूवल व्यवस्था की बड़ी खामी बताते हुए दावा कर रहे हैं कि यदि नई प्रणाली लागू हुई तो ऐसी गड़बड़ियां रोजाना होंगी और सरकार को भारी राजस्व नुकसान उठाना पड़ेगा। डीलरों ने बिना टैक्स जमा कराए कर दिया पंजीकरण आरटीओ अधिकारियों के अनुसार वाहन-4 (VAHAN) पोर्टल की जांच के दौरान पता चला कि मोटर कैब सेल्स प्राइवेट लिमिटेड ने एक मैक्सी कैब, स्वीफ्ट ट्रक एलएलपी ने एक ट्रक और नारायण ऑटोमोबाइल्स ने एक ई-ऑटो का पंजीकरण कर दिया। जांच में सामने आया कि इन वाहनों का टैक्स जमा ही नहीं कराया गया था, इसके बावजूद ऑनलाइन आवेदन जनरेट कर पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। चूंकि डीलर प्वाइंट से ही पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है, इसलिए यह गड़बड़ी संभव हो सकी। राजस्व नुकसान और फ्रॉड की आशंका परिवहन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में यह गड़बड़ी पकड़ में आ गई, लेकिन यदि पूरी प्रक्रिया ऑटो अप्रूवल मोड पर चली गई तो ऐसे मामलों का पता लगाना मुश्किल होगा। उनका कहना है कि इससे न केवल सरकार को राजस्व की हानि होगी बल्कि फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के मामलों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। ऑटो अप्रूवल का कर्मचारियों ने किया विरोध नई व्यवस्था के विरोध में उत्तर प्रदेश संभागीय परिवहन कर्मचारी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार को परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन से मुलाकात की। संघ के प्रांतीय अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम की मूल भावना को नजरअंदाज कर नई व्यवस्था लागू नहीं की जानी चाहिए। उनका कहना है कि फेसलेस सेवाएं स्वागत योग्य हैं, लेकिन अंतिम सत्यापन और स्वीकृति का अधिकार परिवहन विभाग के पास ही रहना चाहिए। संघ मंगलवार को इस मुद्दे पर परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह से भी मुलाकात करेगा। लर्नर डीएल की खामियों का दिया हवाला कर्मचारियों ने तर्क दिया कि पूरी तरह ऑनलाइन लर्नर ड्राइविंग लाइसेंस प्रणाली में पहले से कई तकनीकी समस्याएं सामने आती रही हैं। आधार में पिता का नाम नहीं होने, ओटीपी न मिलने, स्मार्ट लॉक संबंधी दिक्कतों और मृतकों के नाम पर लाइसेंस बनने जैसे मामलों से अब तक पूरी तरह निपटा नहीं जा सका है। ऐसे में 52 परिवहन सेवाओं को ऑटो अप्रूवल मोड में लाने से नई समस्याएं और बढ़ सकती हैं। 52 सेवाएं होंगी ऑटो अप्रूवल के दायरे में शासन स्तर पर सोमवार को हुई बैठक में वाहन पंजीकरण, स्वामित्व हस्तांतरण सहित 52 परिवहन सेवाओं को ऑटो अप्रूवल प्रणाली में शामिल करने पर सहमति बनी। इसके बाद आवेदकों को इन सेवाओं के लिए आरटीओ कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा। एनआईसी और कॉमन सर्विस सेंटर को भी पोर्टल में आवश्यक तकनीकी बदलाव करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का पक्ष परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि ऑटो अप्रूवल व्यवस्था लागू करने पर सहमति बन चुकी है। नई प्रणाली से आवेदकों को राहत मिलेगी, प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी होंगी और 52 सेवाएं बिना कार्यालय आए ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएंगी। हालांकि विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि व्यवस्था लागू करने से पहले सुरक्षा और सत्यापन संबंधी खामियों को दूर करना जरूरी है।
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लखनऊ में तीन वाहनों का बिना टैक्स पंजीकरण:ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ में सामने आई गड़बड़ी, पंजीकरण निरस्त कराने के लिए आईटी शाखा को भेजा गया प्रस्ताव