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श्रावस्ती जनपद के भिनगा और जमुनहा क्षेत्रों में अलग-अलग जगहों पर शनिवार को 4:00 बजे के बाद पारंपरिक ‘बीसवां’ का आयोजन श्रद्धा और शांतिपूर्ण माहौल में शुरू हुआ। यह आयोजन मुहर्रम के लगभग 20 दिन बाद मनाया जाता है, जिसमें स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग-अलग तिथियों पर कार्यक्रम होते हैं। नासिरगंज सहित कुछ स्थानों पर यह आयोजन पहले ही संपन्न हो चुका था। वहीं आज शनिवार को जमुनहा क्षेत्र और भिनगा तहसील के इटवरिया गांव में ‘बीसवां’ मनाया गया। ‘बीसवां’ के अवसर पर ढोल-नगाड़ों की गूंज और ‘या हुसैन’ के नारों के साथ ताजिया जुलूस निकाले गए। इन जुलूसों में बड़ी संख्या में ताजियादार और अकीदतमंद शामिल हुए। पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार, देर शाम ताजियों को कर्बला ले जाकर सुपुर्द-ए-खाक किया जायेगा। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन और पुलिस ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल तैनात हैं, जिससे आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। मुहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना है। यह पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की कर्बला के मैदान में हुई शहादत की याद में शोक, त्याग और बलिदान के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। ‘बीसवां’ की परंपरा भी इसी शहादत की याद को जीवंत रखने और अकीदत प्रकट करने का एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है।
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मोहर्रम के 20 दिन बाद निकला बीसवां का ताजिया जुलूस:श्रावस्ती में अलग-अलग जगहों पर अकीदत के साथ गूंजे 'या हुसैन' के नारे