Rajasthan Open Jail Marriage Permission

जोधपुर6 मिनट पहलेलेखक: लीगल रिपोर्टर

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राजस्थान में जेल सुधार और कैदियों के पुनर्वास की दिशा में हाईकोर्ट ने एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। प्रदेश के न्यायिक इतिहास में यह पहला मौका होगा जब किसी ओपन जेल (खुला बंदी शिविर) परिसर के भीतर दो दोषियों की शादी होगी। राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मंडोर ओपन जेल में रह रहे उम्रकैद के बंदी को जमानत (पैरोल) पर बाहर चल रही एक अन्य दोषसिद्ध महिला से विवाह करने की कानूनी हरी झंडी दे दी है।

यह ऐतिहासिक आदेश न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी एवं न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने जारी किया। इस फैसले को भविष्य में कैदियों के संवैधानिक अधिकारों और मानवीय गरिमा से जुड़े मामलों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल माना जा रहा है।

22 जुलाई को मंडोर ओपन जेल में होंगे फेरे

ओपन जेल में रहकर सजा काट रहे मूलाराम भाटी (33) और सीमा (31) आगामी 22 जुलाई को शादी करेंगे। सहेली के पिता कन्यादान करेंगे। शादी के निमंत्रण पत्र (कार्ड) में पिता के स्थान पर उनका ही नाम लिखा गया है। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार, यह शादी मंडोर ओपन एयर कैंप परिसर में ही जेल प्रशासन की सख्त निगरानी में होगी।

खेती करते-करते बढ़ीं नजदीकियां, जेल में ही हुआ प्यार

जानकारी के अनुसार, नागौर जिले के अडसिंगा का रहने वाला मूलाराम करीब दो साल पहले अजमेर जेल से जोधपुर की मंडोर ओपन जेल में शिफ्ट हुआ था। मुंबई की रहने वाली सीमा को करीब डेढ़ साल पहले महिला जेल से इसी ओपन जेल में भेजा गया था।

ओपन जेल के नियमों के तहत दोनों वहां खेती का काम करते थे। रोज काम के दौरान दोनों का संपर्क हुआ, बातचीत बढ़ी और धीरे-धीरे यह नजदीकियां प्यार में बदल गईं। हाल ही में सीमा को 40 दिन की पैरोल (जमानत) मिली है, जिसके बाद दोनों ने शादी करने का फैसला किया।

होकोर्ट बोला- सजा का मकसद केवल दंड देना नहीं, सुधार भी है

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता मूलाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कालूराम भाटी और अधिवक्ता स्वप्न चौहान ने पैरवी की। राज्य सरकार की ओर से सरकारी वकील (लोक अभियोजक) सी.एस. ओझा और श्रवण सिंह राठौड़ कोर्ट में उपस्थित रहे। राज्य सरकार ने भी इस विवाह पर कोई आपत्ति नहीं जताई।

हाईकोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में वर्ष 2022 के प्रसिद्ध ‘नंदलाल बनाम राज्य’ मामले के निर्णय का उल्लेख किया। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा- जेल सुधार व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य अपराधियों को केवल दंडित करना या समाज से अलग करना नहीं है, बल्कि उनका पुनर्वास करना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के अवसर प्रदान करना भी है।

वर्ष 2017 से न्यायिक अभिरक्षा में चल रहे मूलाराम की इस याचिका को स्वीकार करना राजस्थान की जेल प्रणालियों में मानवीय दृष्टिकोण का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है।

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