'कालनेमि और पाखंडियों से आप लोग सावधान रहें':शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले- किसी कीऔकात नहीं जो मुझे अपना एजेंट बना ले


गोंडा में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बुधवार शाम करीब 5:30 बजे अपनी ‘गौ-रक्षार्थ धर्म युद्ध यात्रा’ के तहत गोंडा जिले के मेंहनौन पहुंचे। दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे शंकराचार्य का समर्थकों ने स्वागत किया। उन्होंने गाय को ‘गौ माता’ का दर्जा देने और गोधाम निर्माण के अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना है। उनके अनुसार, कुछ लोग स्वयं को हिंदू बताकर समाज को भ्रमित कर रहे हैं, जिससे सनातन धर्म को नुकसान पहुंच रहा है। ‘समानांतर अभियान चलाकर लोगों को भ्रमित किया जा रहा’ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि उनके आंदोलन को कमजोर करने के लिए समानांतर अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि 27 अप्रैल को देशभर की तहसीलों में ज्ञापन दिए गए थे और अब 27 जुलाई को जिलाधिकारी कार्यालयों पर हस्ताक्षर अभियान चलाकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र और उत्तर प्रदेश दोनों जगह एक ही दल की सरकार है, तो फिर हस्ताक्षर अभियान और जुलूस निकालने की जरूरत क्यों पड़ रही है। उन्होंने ऐसे अभियानों को “दिखावटी” करार दिया। सरकार से उठाए सवाल शंकराचार्य ने कहा कि यदि सरकार चाहे तो गाय से जुड़े मुद्दों पर तुरंत निर्णय ले सकती है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से सत्ता में रहने के बावजूद गाय को ‘माता’ घोषित करने का निर्णय नहीं लिया गया। उनके अनुसार, यदि यह प्राथमिकता होती तो सरकार बनने के बाद सबसे पहले इस दिशा में कदम उठाए जाते। मतदाताओं से की अपील सभा में उन्होंने लोगों से आगामी विधानसभा चुनाव में मतदान से पहले गौ संरक्षण के मुद्दे पर विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मतदाता उन राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों का समर्थन करें जो गौ संरक्षण के लिए ठोस निर्णय लेने की घोषणा करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक दल के पक्ष में प्रचार नहीं कर रहे हैं, बल्कि स्वयं को “गौ माता और सनातन धर्म का प्रतिनिधि” बताते हुए लोगों से गौ संरक्षण को प्राथमिकता देने की अपील कर रहे हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यदि मतदाता संगठित होकर गौ संरक्षण को चुनावी मुद्दा बनाएंगे तो सभी राजनीतिक दल इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाने के लिए बाध्य होंगे।

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