कानपुर देहात में सीएचसी अधीक्षक और सीएचओ में विवाद:मारपीट, धमकी और छेड़छाड़ के आरोपों के बीच जांच शुरू


कानपुर देहात के झींझक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (सीएचओ) और अधीक्षक के बीच विवाद गहरा गया है। सीएचओ ने अधीक्षक पर मारपीट, धमकी देने और मोबाइल का डेटा डिलीट करने का आरोप लगाया है। वहीं, अधीक्षक ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए सीएचओ पर ही सवाल उठाए हैं। मामला अब पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) तक पहुंच गया है। सीएचओ बोले- कार्यालय बुलाकर की मारपीट, मोबाइल छीनकर डेटा डिलीट किया झींझक ब्लॉक के आयुष्मान आरोग्य मंदिर, रामपुर टप्पेवान में तैनात सीएचओ मनीष कुमार ने सीएचसी अधीक्षक डॉ. पीयूष त्रिपाठी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मनीष कुमार का कहना है कि अधीक्षक ने उन्हें अपने कार्यालय बुलाया, जहां पहले से मौजूद 20-25 लोगों ने उनके साथ मारपीट की। उनका आरोप है कि इस दौरान उनका मोबाइल छीन लिया गया, उसका डेटा डिलीट कर दिया गया और उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी गई।
परिवार के साथ पहुंचे एसपी कार्यालय सीएचओ मनीष कुमार का आरोप है कि घटना के बावजूद पुलिस ने अब तक उनकी प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज नहीं की है। इसी मांग को लेकर वह अपने परिवार के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और कार्रवाई की मांग करते हुए न्याय की गुहार लगाई। अधीक्षक बोले- युवती से छेड़छाड़ की शिकायत लेकर पहुंचे थे लोग दूसरी ओर, सीएचसी अधीक्षक डॉ. पीयूष त्रिपाठी ने सीएचओ के सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि जब मनीष कुमार उनके कार्यालय पहुंचे, तब वहां कुछ लोग पहले से मौजूद थे। ये लोग मनीष कुमार के खिलाफ एक युवती से कथित छेड़छाड़ की शिकायत लेकर आए थे। डॉ. त्रिपाठी के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच बहस होने लगी, जिसके बाद उन्होंने सभी को कार्यालय से बाहर जाकर बातचीत करने के लिए कहा। उनका आरोप है कि इसके बाद सीएचओ सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ मनगढ़ंत आरोप प्रसारित कर रहे हैं। छेड़छाड़ की शिकायत को लेकर भी उठ रहे सवाल इस पूरे घटनाक्रम के बीच कुछ सवाल भी उठ रहे हैं। यदि मामला कथित छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप से जुड़ा था, तो शिकायतकर्ता पुलिस के बजाय सीधे सीएचसी अधीक्षक के कार्यालय क्यों पहुंचे? हालांकि, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। पहले भी विवादों में रह चुका है झींझक सीएचसी झींझक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहले भी विवादों में रहा है। कुछ समय पहले यहां बड़ी संख्या में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी होने का मामला सामने आया था। जिलाधिकारी के निर्देश पर सीएमओ ने जांच के लिए एक टीम गठित की थी, लेकिन वह जांच अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। पुराने विवाद और तैनाती को लेकर भी चर्चा स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि डॉ. पीयूष त्रिपाठी की झींझक सीएचसी में तैनाती के बाद से लगातार विरोध की स्थिति बनी हुई है। लोगों का कहना है कि तत्कालीन अधीक्षक डॉ. दीपक गुप्ता, जो वर्तमान में रसूलाबाद सीएचसी में तैनात हैं, झींझक में ही बने रहना चाहते थे और उनके समर्थक भी यही चाहते थे। बाद में शासन ने डॉ. पीयूष त्रिपाठी की तैनाती कर दी। बताया जाता है कि उनकी तैनाती के बाद कुछ कर्मचारियों ने विरोध करते हुए कई दिनों तक कार्य बहिष्कार किया और धरने पर बैठे रहे। बाद में उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ। अब डॉ. पीयूष त्रिपाठी का आरोप है कि उनके खिलाफ एक सोची-समझी साजिश रची जा रही है। जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित सीएमओ ने मौजूदा विवाद की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया है। फिलहाल दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई और जांच समिति की रिपोर्ट के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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