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कानपुर देहात के एक मजदूर की 13 वर्षीय बेटी शिवांगी को चार दिन तक कानपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती रखने के बावजूद उसका ऑपरेशन नहीं हो सका। पिता रिंकू ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में उनकी बेटी का इलाज रोक दिया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया, जिसके बाद वह बच्ची को बिना इलाज के ही घर ले गए। रसूलाबाद क्षेत्र के कारेरामपुर गांव निवासी रिंकू की बेटी शिवांगी का हाथ टूट गया था। उसे 11 जुलाई को कानपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। रिंकू का कहना है कि चार दिन तक अस्पताल में रहने के बावजूद न तो उसकी बेटी का ऑपरेशन हुआ और न ही इलाज आगे बढ़ा। रिंकू ने डॉक्टरों से अपनी आर्थिक मजबूरी बताते हुए मदद की गुहार लगाई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने यह कहते हुए इलाज बंद कर दिया कि “अब तुम मीडिया और नेतागिरी करो, यहां तुम्हारा इलाज नहीं होगा।” रिंकू के अनुसार, डॉक्टरों ने यह भी कहा, “जाओ तुम नेतानगरी करवाओ, विधायक को ले आओ, कोई आ जाए, इलाज नहीं होगा।” रिंकू ने बताया कि इस घटना के बाद उनकी पत्नी रोने लगीं और बेटी शिवांगी ने भी कहा कि उसे इलाज नहीं कराना, घर ले चलो। इसके बाद रिंकू अपनी बेटी को बिना इलाज के ही घर वापस ले गए। पीड़ित पिता ने बताया कि जब उन्हें लगा कि इलाज नहीं होगा, तो उन्होंने बच्ची को छुट्टी देने को कहा। शुरुआत में अस्पताल प्रशासन ने डिस्चार्ज देने से इनकार कर दिया, लेकिन जब उन्होंने अपनी जिम्मेदारी पर बच्ची को ले जाने की बात कही, तब कागजी कार्रवाई पूरी कर उन्हें जाने दिया गया। रिंकू के पास ऑपरेशन के लिए आवश्यक रकम नहीं है और वह पैसे का इंतजाम होने के बाद ही बेटी का इलाज करा पाएंगे।
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डॉक्टर बोले- नेतागिरी कर लो नहीं होगा इलाज़:मेडिकल कॉलेज में चार दिन भर्ती रही मासूम, ऑपरेशन नहीं हुआ; बेबसी में पिता बेटी को घर ले गया