सुलतानपुर2 मिनट पहले
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सुल्तानपुर के बंधुआकला थाना अंतर्गत हसनपुर स्थित हज़रत अशशाह झलिया शहीद की दरगाह पर रविवार रात शोहदाए इस्लाम कांफ्रेंस व उर्स पाक का आयोजन किया गया। मौलाना मंजूर अहमद की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में कोलकाता से आए मौलाना सैफुल्लाह अलीमी ने लोगों को संबोधित किया।
कोलकाता के मशहूर इस्लामिक स्कॉलर मौलाना सैफुल्लाह अलीमी ने रविवार देर रात करीब 11:15 बजे मीडिया से मुखातिब होते हुए कर्बला के शहीदों और हजरत इमाम अली मकाम की शहादत, हौसले और उनके सब्र व शुक्र का जिक्र किया। उन्होंने समाज को जुल्म और बर्बरता के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा दी।

मौलाना अलीमी ने बताया कि ऐसे धार्मिक कार्यक्रमों का मुख्य मकसद बिगड़े हुए नौजवानों को सही रास्ता दिखाना और उन्हें सब्र व शुक्र की अहमियत समझाना है। उन्होंने युवाओं से बुराई का रास्ता छोड़कर नेकी की राह पर चलने की अपील की।

उन्होंने चिंता व्यक्त की कि आज कौम के बच्चे और बच्चियां धार्मिक और दुनियावी दोनों ही तरह की शिक्षा के प्लेटफॉर्म से दूर हो रहे हैं। मौलाना ने कहा, “अगर हमारे बच्चे दीनी और दुनियावी दोनों तालीम हासिल करेंगे, तो समाज में जिल्लत और रुसवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। हमारी कौम के युवाओं को IAS, IPS जैसे बड़े इम्तिहान पास करके उच्च पदों पर बैठना चाहिए, ताकि वे कौम और देश का नाम रोशन कर सकें और समाज को एक मजबूत सहारा दे सकें।”

जब मौलाना से समाज में बढ़ती दहेज प्रथा के चलन को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज करते हुए ‘बेहद घटिया हरकत’ बताया। उन्होंने जानकारी दी कि दिसंबर 2022 से ही वे बिहार, बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में दहेज के खिलाफ लगातार मुहिम चला रहे हैं और युवाओं को इस सामाजिक बुराई से दूर रहने के लिए जागरूक कर रहे हैं।

इस कार्यक्रम में मौलाना शरीफ नवाज शीवली और मौलाना मंजूर अहमद ने तकरीरें कीं। असरार वरासी सुल्तानपूरी, एहसान शाकिर आज़मगढ़ी, असद इक़बाल कलकतवी और अज़मत सुल्तानपूरी ने नाते रसूल पढ़ा। कार्यक्रम का संचालन फिरोज अख्तर रायबरेलवी ने किया। अंजुमन आशिकाने झलिया शाह तवंगर शाह ने आए हुए लोगों का धन्यवाद प्रकट किया।
