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नोएडा मज़दूर आंदोलन के कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी और तीन महीने से उनकी रिहाई न होने के विरोध में शनिवार को प्रयागराज में छात्रों ने प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रसंघ भवन के बाहर ‘कारवां’ के देशव्यापी आह्वान पर आयोजित किया गया था। इसमें दिशा छात्र संगठन और नौजवान भारत सभा के कार्यकर्ताओं ने सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ आवाज़ उठाई। प्रदर्शनकारियों ने उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली को ‘संवैधानिक अधिकारों पर हमला’ बताया। दिशा छात्र संगठन के प्रशांत ने आरोप लगाया कि नोएडा वर्कर्स प्रोटेस्ट केस में पुलिस की कार्रवाई लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के विपरीत है। उन्होंने कहा कि आठ कार्यकर्ताओं को तीन महीने से अधिक समय तक जेल में रखना और श्रमिकों को हिरासत में यातना देना प्रदेश में ‘पुलिसिया तानाशाही’ का प्रमाण है। छात्रों ने पुलिस द्वारा हाल ही में दाखिल की गई चार्जशीट को ‘फर्जीवाड़े का दस्तावेज’ करार देते हुए खारिज कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि चार्जशीट में एक ही व्यक्ति की गिरफ्तारी की तारीखों में विरोधाभास है, जिससे पुलिस के दावों पर संदेह पैदा होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस सत्यम वर्मा पर ‘मार्क्सवादी होने’ का आरोप लगाकर वैचारिक असहमति को अपराध की श्रेणी में ला रही है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, एक ही घटनाक्रम में 11 एफआईआर दर्ज करना कार्यकर्ताओं को जेल में रखने का एक सुनियोजित षड्यंत्र है। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि पिछले तीन महीनों में यूपी पुलिस द्वारा सबूतों का निर्माण और मनमानी कार्रवाई ने प्रदेश में भय का माहौल पैदा किया है। दिशा छात्र संगठन के चंद्रप्रकाश ने सरकार को चेतावनी दी कि वे तब तक शांत नहीं बैठेंगे, जब तक सभी कार्यकर्ताओं पर दर्ज ‘फर्जी मुकदमे’ वापस नहीं लिए जाते और उनकी तत्काल रिहाई सुनिश्चित नहीं की जाती। इस प्रदर्शन में चंचल, निधि, प्रियांशु, पूजा, अमन और जय सहित बड़ी संख्या में छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
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नोएडा मज़दूर आंदोलन के कार्यकर्ताओं की कैद के खिलाफ उबाल:प्रयागराज में इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ भवन के बाहर छात्रों ने किया प्रदर्शन