5 साल में नहीं सुलझाए जमीन बंटवारे के 95 मामले:प्रयागराज के तहसीलदारों और उप जिलाधिकारियों की उदासीनता पर डीएम खफा


प्रयागराज में जमीन के विवादों को सुलझाने में सभी तहसीलों के तहसीलदार और उप जिलाधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं। शुक्रवार देर शाम संगम सभागार में आईजीआरएस और राजस्व कार्यों की समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा को यह जानकारी मिली। बैठक में सामने आया कि जमीन बंटवारे (धारा-116) के 95 मामले पिछले पांच साल से भी अधिक समय से लंबित हैं। इसी तरह, धारा-24 (पैमाइश/पत्थरगणी) के 50 मामले तीन वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं। इसके अलावा, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और सुधार से संबंधित एक वर्ष से लंबित सभी मामलों को तत्काल निपटाने का निर्देश दिया गया। डीएम ने राजस्व विभाग के अफसरों की हीलाहवाली पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि इस महीने हर हाल में सभी लंबित मामलों का निस्तारण करें। उन्होंने अंश निर्धारण से जुड़े सभी लंबित मामलों को 15 जुलाई तक सुलझाने का भी निर्देश दिया। बैठक में जिलाधिकारी के सामने जब एक ही तरह के प्रकरणों की बार-बार आ रही शिकायतें पहुंचीं, तो उन्होंने मौके पर ही 8 गंभीर शिकायतकर्ताओं की व्यक्तिगत रूप से सुनवाई की। ये मामले चकमार्ग पर अवैध कब्जे, सीमाचिह्न, पत्थरगढ़ी और भूमि विवादों से जुड़े थे। डीएम ने संबंधित उपजिलाधिकारियों को तत्काल मौके पर जाकर इन शिकायतों का निस्तारण करने के कड़े निर्देश दिए। डीएम ने अधिकारियों से कहा कि वे केवल दफ्तर में न बैठें, बल्कि जमीन के विवादों को गंभीरता से लेते हुए खुद मौके पर जाएं और निष्पक्ष व गुणवत्तापूर्ण तरीके से निपटारा करें। जिन तहसीलों की रैंकिंग धारा-34 (म्यूटेशन), धारा-80 (गैर-कृषि भूमि घोषणा) और धारा-116 में खराब है, उन्हें विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। डीएम ने म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) के मामलों में सीधे तौर पर अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि एक सप्ताह के बाद किसी भी तहसील में म्यूटेशन का कोई भी प्रकरण निर्धारित समयसीमा के बाद लंबित पाया गया, तो संबंधित अधिकारी और पटल प्रभारी के विरुद्ध तत्काल कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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