अयोध्या के श्रीराम मंदिर ट्रस्ट की जिम्मेदारियां अब मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) संभालेगा। ट्रस्टियों ने तय किया है कि किसी IAS अफसर को CEO नहीं बनाया जाएगा। यह जिम्मेदारी किसी रिटायर्ड अधिकारी को सौंपी जाएगी।
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ऐसा क्यों? इसका जवाब ट्रस्ट से जुड़े एक पदाधिकारी देते हैं- ब्यूरोक्रेट अगर CEO बनता है, तो मंदिर का मैनेजमेंट सरकार के पास चला जाएगा। जबकि, अभी तक श्रीराम मंदिर ट्रस्ट स्वतंत्र है। रिटायर्ड अधिकारी होने से CEO की जवाबदेही सिर्फ ट्रस्ट के लिए होगी। हालांकि, काशी विश्वनाथ मंदिर, उज्जैन के महाकाल जैसे कई मंदिरों में कोई IAS या PCS अधिकारी ही सीईओ बनाया जाता है।
22 जुलाई को ट्रस्ट के सामने 3 नामों की लिस्ट रखी जाएगी। पदाधिकारी इनमें से एक नाम चुनेंगे। इसके बाद उनके कामकाज का ब्लूप्रिंट भी तय किया जाएगा।

6 जुलाई को राम मंदिर ट्रस्ट की मीटिंग में 8 पदाधिकारी पहुंचे थे। 4 पदाधिकारी नहीं पहुंच सके थे। वो ऑनलाइन जुड़े थे।
मल्टीनेशनल कंपनी की तरह बनेगा स्टाफ स्ट्रक्चर
ट्रस्ट अब राम मंदिर का मैनेजमेंट एक मल्टीनेशन कंपनी की तरह चलाना चाहता है। यानी ट्रस्ट के चेयरमैन के नीचे CEO काम करेगा। उसके नीचे इंजीनियर और फाइनेंशियल एक्सपर्ट होंगे। 1500 से 2000 कर्मचारियों का स्टाफ होगा। इस स्ट्रक्चर में काम करने वाले कर्मचारियों को सैलरी दी जाएगी।
CEO को भी एक तय वेतन मिलेगा। अभी तक ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को वेतन नहीं मिलता था। पूरा मैनेजमेंट रामभक्तों के लिए ट्रांसपेरेंट होगा। मतलब, ट्रस्ट क्या कर रहा है? ये अपडेट भी लोग देख सकेंगे।
इस बारे में श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि कहते हैं-
श्रीराम मंदिर ट्रस्ट बनने के समय हम ये महसूस नहीं कर पाए कि इसको चलाने के लिए पेशेवर लोगों की जरूरत होगी। चढ़ावा चोरी सामने आने के बाद ट्रस्ट ने ऐसा महसूस किया। CEO ट्रस्ट के लिए जवाबदेह होगा न कि सरकार के लिए। इसलिए रिटायर आईएएस या उसके समकक्ष योग्यता वाले व्यक्ति की इस पद पर नियुक्ति की जाएगी।

6 जुलाई को हुई बैठक में ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने माना कि मंदिर के कामकाज की मॉनीटरिंग और मजबूती से होने की जरूरत है। इस वक्त दो ट्रस्टियों को छोड़कर ज्यादातर दूसरे राज्य या शहरों से अयोध्या आते हैं। रेगुलर कोई अयोध्या में मौजूद नहीं रहता। ऐसे में CEO ही सारी जिम्मेदारियां संभालेंगे।

3 सदस्यों की समिति बनी, वही चुनेगी CEO
CEO कौन होगा? यह 3 सदस्यों वाली कमेटी तय करेगी। समिति को 22 जुलाई तक CEO पद के लिए 3 नामों की लिस्ट देनी है। साथ ही ये क्या-क्या जिम्मेदारियां संभालेंगे, इस पर एक रिपोर्ट सौंपनी है।
इस पोस्ट पर आने वाले रिटायर्ड अधिकारी को सबसे पहले दो बड़े काम करने होंगे। पहला- चढ़ावा चोरी रोकने पर एसआईटी के सुझावों को लागू करना होगा। दूसरा- AI कैमरे और फेशियल रिकग्निशन का इस्तेमाल करना।

CEO का काम कैसा होगा? इस पर ट्रस्ट के पदाधिकारी कहते हैं- उनका दिन सुबह मंदिर में रामलला के दर्शन और पूजन के साथ शुरू होगा। इसके बाद श्रद्धालुओं से फीडबैक लेना, मंदिर के निर्माण देखना और मीडिया ब्रीफिंग उनके शेड्यूल का हिस्सा रहेंगे। चूंकि मंदिर 24 घंटे सातों दिन चलता है, इसलिए कर्मचारियों का शिफ्ट मैनेजमेंट भी वही संभालेंगे।

ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई सच्चाई
ट्रस्ट ने 514 करोड़ खर्चे, जिसका कोई हिसाब नहीं
SIT जांच के दौरान 1 अप्रैल, 2025 से लेकर 31 मार्च, 2026 का डेटा देखने के बाद सामने आया कि ट्रस्ट ने 514 करोड़ से ज्यादा खर्च किए। लेकिन, इसका कोई सटीक हिसाब नहीं रखा गया। हैरानी की बात यह है कि ये सभी खर्च अनुमानित हैं। इन खर्चों के ऑडिट और कानूनी फीस पर भी 16 लाख रुपए खर्च दिखाए गए हैं।
15 लाख रुपए से यात्राएं की गईं, लेकिन ये नहीं लिखा गया कि ये ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने कीं या कर्मचारियों ने। रिकॉर्ड में वेलफेयर गतिविधियों पर 2.59 करोड़ और 2.71 करोड़ रुपए अन्य खर्च में दिखाए गए। जिसकी कोई डिटेल नहीं लिखी गई।
सबसे ज्यादा 11.49 करोड़ रुपए सिर्फ सिक्योरिटी पर खर्च हुए, लेकिन चढ़ावा चोरी होता रहा। स्पेशल इवेंट कराने के लिए 1.84 करोड़ खर्च हुए, लेकिन इवेंट क्या कराया, ये नहीं लिखा गया। कुछ अन्य खर्च इस तरह हैं, जो रिपोर्ट में दिखाए गए-
- 375 करोड़ मंदिर निर्माण से जुड़े कामों पर
- 21.53 करोड़ रुपए जमीन खरीदने में
- 9.81 करोड़ एलएंडटी कंपनी का पेमेंट
- 4.83 करोड़ यात्री स्वागत केंद्र पर
- 2.76 करोड़ राम निवास के पास डोरमेट्री निर्माण पर
- 2.70 करोड़ बाग बिजैसी के पास निर्माणों पर
66 लाख में सिर्फ 45 दिन वीडियो स्टोरेज खरीदी, सुझाव 180 दिन का
SIT रिपोर्ट में सामने आया कि चढ़ावा की गणना जिस कमरे में होती थी, वहां लगे CCTV की रिकॉर्डिंग 45 दिन में ऑटो डिलीट हो जाती थी। इस स्टोरेज के लिए ट्रस्ट ने 66 लाख रुपए खर्च किए। पिछले साल हुई इंटरनल ऑडिट में ट्रस्ट को सुझाव दिया गया था कि 180 दिन तक फुटेज को सुरक्षित रखनी चाहिए।
लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यही वजह है कि जांच के दौरान पुरानी CCTV फुटेज नहीं मिल सकी। इस पर दैनिक भास्कर ने साइबर एक्सपर्ट रिटायर्ड एसपी त्रिवेणी सिंह से बात की। वह कहते हैं-
वीडियो को क्लाउड स्टोरेज में सुरक्षित रखा जाता है। जितनी ज्यादा स्टोरेज, उतना पेमेंट करना पड़ता है। RBI का नियम है कि कैश संबंधित रिकार्डिंग को कम से कम 5 साल तक सुरक्षित रखना चाहिए। आयकर विभाग इसको 7 साल तक सुरक्षित रखने के लिए कहता है।

अब राम मंदिर की संपत्ति जानिए
मंदिर के पास 32 किलो सोना, 1518 किलो चांदी
श्रीराम मंदिर निर्माण से लेकर अब तक चढ़ावे के रूप में 32 किलो सोना और 1518 किलो चांदी मिली है। चांदी की धातुओं को ट्रस्ट सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया को भेजकर गलवाया जाता है। फिर ट्रस्ट को 99.99% शुद्ध चांदी की ईंट तैयार कर लौटाई गई। इसे ट्रस्ट ने बैंक लॉकर में सुरक्षित रखा है।
मंदिर ट्रस्ट के पास 1876 करोड़ रुपए कैश
6 जुलाई को ट्रस्ट की बैठक में मंदिर को कितना चढ़ावा मिला? उन्हें कहां खर्च किया गया? इसका ब्योरा रखा गया। श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक में खाते हैं। इनमें 1876 करोड़ रुपए जमा है। मंदिर निर्माण के समय समर्पण निधि 3264 करोड़ रुपए मिले थे। मंदिर के चढ़ावा में 582 करोड़ रुपए मिले। इनमें से 2370 करोड़ रुपए मंदिर निर्माण पर और 391 करोड़ रुपए मैनेजमेंट पर खर्च किए गए।
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