कांग्रेस ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर उठाए सवाल:राठौर बोले-SC के सिटिंग जज की निगरानी में जांच करवाएं; SIT पर जताई आपत्ति


अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं ठियोग से विधायक कुलदीप राठौर ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट (SC) के सिटिंग जज की निगरानी में कराने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही केंद्र सरकार पर मामले को दबाने और दोषियों को बचाने का आरोप लगाया। शिमला में शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में राठौर ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और वहां चढ़ावे में कथित चोरी की घटना से 140 करोड़ भारतीयों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच निष्पक्ष एजेंसी से कराई जानी चाहिए ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके। UP सरकार द्वारा गठित SIT पर उठाए सवाल राठौर ने आरोप लगाया कि यह केवल 100 या 200 करोड़ रुपए का मामला नहीं, बल्कि हजारों करोड़ रुपए के चढ़ावे से जुड़ा मामला हो सकता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी में सरकार के नामित अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने दावा किया कि पूरे मामले को दबाने और दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर परिसर की सुरक्षा बेहद कड़ी है, जहां 400 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात हैं और हर जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। ऐसे में यदि चोरी हुई है तो इसकी गहन जांच होना और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होना आवश्यक है। जानबूझकर RTI के दायरे से ट्रस्ट को बाहर रखा कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि राम मंदिर का निर्माण चुनावी लाभ को ध्यान में रखकर जल्दबाजी में कराया गया, जिसके कारण निर्माण में खामियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए गठित ट्रस्ट का संचालन ऐसे लोगों को सौंपा गया, जो सत्ताधारी दल के करीबी हैं, जबकि ट्रस्ट को सूचना के अधिकार (RTI) के दायरे से बाहर रखा गया। राठौर ने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि कथित चढ़ावा चोरी मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए।

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