गोरखपुर में गंभीर मरीजों को बड़ी राहत:बीआरडी में 32 बेड का नया आईसीयू जल्द होगा चालू, मिलेगी नई हाईटेक सुविधा


गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेहरू अस्पताल में गंभीर मरीजों के इलाज की सुविधाएं जल्द और मजबूत होने जा रही हैं। अस्पताल प्रशासन ने लंबे समय से तैयार 32 बेड वाले अत्याधुनिक ICU को शुरू करने की तैयारियां तेज कर दी हैं। इसके साथ ही कॉमन ICU के लिए पांच नए वेंटिलेटर की खरीद भी अंतिम चरण में पहुंच गई है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद गंभीर मरीजों को समय पर बेहतर इलाज मिलेगा और अस्पताल की क्रिटिकल केयर सेवाओं का दायरा भी काफी बढ़ जाएगा। छह में सिर्फ एक वेंटिलेटर चालू वर्तमान में नेहरू अस्पताल के कॉमन ICU में छह वेंटिलेटर युक्त बेड हैं, लेकिन इनमें से केवल एक वेंटिलेटर ही चालू हालत में है। बाकी वेंटिलेटर तकनीकी खराबी के कारण लंबे समय से बंद पड़े हैं। ऐसे में सांस लेने में गंभीर दिक्कत वाले मरीजों के इलाज में कठिनाई आ रही है। कई बार मरीजों को अंबु बैग के जरिए कृत्रिम सांस देनी पड़ती है, जिसे लगातार हाथ से संचालित करना पड़ता है। इससे मरीजों के साथ उनके तीमारदारों की परेशानी भी कई गुना बढ़ जाती है। स्टाफ की कमी बनी थी सबसे बड़ी बाधा मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पताल में 32 बेड का नया ICU काफी पहले तैयार कर लिया गया था, लेकिन डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के कारण इसे शुरू नहीं किया जा सका। अब मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है। उम्मीद है कि जल्द ही स्टाफ की तैनाती पूरी होने के बाद नया ICU मरीजों के लिए खोल दिया जाएगा। ICU में बढ़ेगी क्षमता नया ICU शुरू होने और पांच नए वेंटिलेटर मिलने के बाद अस्पताल में गंभीर मरीजों के इलाज की क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। इससे ICU बेड की कमी दूर होगी, मरीजों को समय पर वेंटिलेटर सपोर्ट मिल सकेगा और गंभीर स्थिति में दूसरे अस्पतालों में रेफर करने की जरूरत भी कम पड़ेगी। साथ ही अंबु बैग के सहारे मरीजों को संभालने जैसी स्थिति से भी काफी हद तक राहत मिलेगी। जल्द मिलेगी नई सुविधा
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि नए ICU को जल्द शुरू करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। पांच नए वेंटिलेटर की खरीद प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। दोनों व्यवस्थाएं शुरू होने के बाद गंभीर मरीजों को पहले से अधिक आधुनिक, सुरक्षित और बेहतर उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। अस्पताल की क्रिटिकल केयर व्यवस्था भी पहले के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत हो जाएगी।

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