वरुण कुमार शर्मा | मुजफ्फरनगर6 घंटे पहले
- कॉपी लिंक

मजदूरों के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले थे। उन्हें फैक्ट्री में यातनाएं दी गई थीं।
मुजफ्फरनगर के मांडी गांव की दोना-पत्तल फैक्ट्री में 12 मजदूरों को बंधक बनाकर डेढ़ साल तक अमानवीय यातनाएं देने का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच गया है। आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी भेजा है। आयोग ने प्रदेश के मुख्य सचिव एसपी गोयल और पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण से दो हफ्ते में पूरी रिपोर्ट मांगी है।
एनएचआरसी ने अपने आदेश में साफ कहा- यदि मीडिया रिपोर्ट में प्रकाशित तथ्य सही हैं तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है। आयोग ने जिलाधिकारी को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और बंधुआ मजदूरी प्रथा (उन्मूलन) अधिनियम-1976 के तहत पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही आयोग ने 8 दिसंबर 2021 को जारी अपनी एडवाइजरी के अनुसार सभी मुक्त कराए गए श्रमिकों का तत्काल ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण सुनिश्चित करने को भी कहा है।

पुलिस ने फैक्ट्री में छापा मारा था। आरोपियों को गिरफ्तार कर मीडिया के सामने पेशकर पूरे मामले की जानकारी दी थी।
दरअसल मुजफ्फनगर के मांडी गांव की दोना-पत्तल फैक्ट्री में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों और नेपाल के मजदूरों को नौकरी का झांसा देकर लाया गया था।
आरोप है कि फैक्ट्री पहुंचने के बाद उनके मोबाइल फोन और पहचान पत्र छीन लिए गए। उन्हें पर्याप्त भोजन और मजदूरी दिए बिना देर रात तक जबरन काम कराया जाता था। विरोध करने पर मारपीट की जाती थी। भागने से रोकने के लिए पिटबुल कुत्तों का इस्तेमाल किया जाता था।

फैक्ट्री में मजदूरों को बंधुआ बनाने का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) तक पहुंच गया। आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भेजा है।
बताया गया है कि एक मजदूर किसी तरह फैक्ट्री से भागकर तितावी थाने पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने छापेमारी कर बाकी मजदूरों को मुक्त कराया। मेडिकल जांच में कई मजदूरों के शरीर पर गंभीर चोटें, पुराने घाव और हड्डी टूटने के निशान मिलने का दावा किया गया। रिपोर्ट में एक मजदूर की मौत का भी उल्लेख है, जबकि पुलिस अन्य संभावित मौतों की भी जांच कर रही है।
एनएचआरसी के स्वतः संज्ञान लेने के बाद यह मामला अब केवल जिला या राज्य स्तर तक सीमित नहीं रह गया है। आयोग की निगरानी में होने वाली जांच और यूपी सरकार की रिपोर्ट पर अब पूरे देश की नजर रहेगी।
