अयोध्या में खुरपका-मुंहपका टीकाकरण पर उठे सवाल:गांवों तक नहीं पहुंची टीम, विभाग ने 4.32 लाख पशुओं के टीकाकरण का दावा किया


अयोध्या जनपद में खुरपका-मुंहपका रोग नियंत्रण के लिए चलाए गए टीकाकरण अभियान पर अब सवाल उठने लगे हैं। पशुपालन विभाग ने 4 लाख 32 हजार 880 पशुओं के टीकाकरण का लक्ष्य निर्धारित किया था और 4 लाख 32 हजार 400 पशुओं को टीका लगाने का दावा किया है। हालांकि, जमीनी हकीकत इन आंकड़ों से मेल नहीं खाती दिख रही है। मिल्कीपुर तहसील के सिधौना, पूरबगांव, पारा, धमथुआ, तेंधा, गोकुला, मसेढ़ा, सरूरपुर, सराय धनेठी और घटौली सहित दर्जनों गांवों के पशुपालकों ने बताया कि उनके यहां टीकाकरण टीम पहुंची ही नहीं। ग्रामीणों के अनुसार, उनके पशुओं को कोई टीका नहीं लगाया गया है, जिससे विभागीय दावों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। जिला मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. इंद्रदेव ने बताया कि खुरपका-मुंहपका एक गंभीर विषाणु जनित बीमारी है। यह मुख्य रूप से गाय, बैल और भैंस को प्रभावित करती है। यह बीमारी संक्रमित पशुओं के संपर्क में आने या उनके साथ खाने-पीने से तेजी से फैलती है। डॉ. इंद्रदेव ने रोग के लक्षणों की जानकारी देते हुए बताया कि संक्रमित पशुओं में 104 से 106 डिग्री फ़ारेनहाइट तक तेज बुखार आता है। उनके मुंह से झागदार लार गिरती है तथा मुंह, जीभ, थनों और खुरों के बीच छाले पड़ जाते हैं। इसके कारण पशु कमजोर हो जाते हैं और उनकी दूध उत्पादन क्षमता भी प्रभावित होती है। गर्भवती पशुओं में गर्भपात की समस्या भी देखने को मिलती है। डॉ. महार ने पशुपालकों को सलाह दी है कि वे स्वस्थ और बीमार पशुओं को अलग रखें। उन्होंने टीकाकरण टीम के गांव पहुंचने पर अपने पशुओं का टीकाकरण अवश्य कराने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी बताया कि यह टीकाकरण पूरी तरह निःशुल्क है और गौशालाओं में रखे पशुओं को भी इसके दायरे में लाया गया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार, कई गौशालाओं में भी टीकाकरण नहीं किया गया है। ऐसे में अब यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है और अभियान की वास्तविक स्थिति क्या है।

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