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बागपत के डौला गांव निवासी विकास के परिजनों ने एक हत्या मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी, आईजी मेरठ, डीजीपी उत्तर प्रदेश, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सीबीआई निदेशक को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग उठाई गई है। परिजनों का आरोप है कि बागपत थाने में दर्ज मुकदमे में विकास को बिना पर्याप्त और ठोस साक्ष्यों के अभियुक्त बनाया गया है। उनका कहना है कि घटना के समय विकास घटनास्थल पर मौजूद नहीं था, फिर भी पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, पुलिस के पास न तो कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य है और न ही कोई स्वतंत्र गवाह है, जो विकास की संलिप्तता को साबित कर सके। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि जांच अधिकारी ने निष्पक्ष जांच करने के बजाय एकतरफा कार्रवाई की है। परिजनों का कहना है कि वास्तविक आरोपियों की भूमिका की गहराई से जांच नहीं की गई, जबकि एक निर्दोष व्यक्ति को आरोपी बनाकर कार्रवाई की गई। उन्होंने दावा किया कि मामले के वास्तविक दोषी अब भी खुलेआम घूम रहे हैं। शिकायत पत्र में मोनू कश्यप और सनी कश्यप के नामों का उल्लेख करते हुए उनकी भूमिका की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। इसके साथ ही, घटना से जुड़े मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन डेटा, व्हाट्सएप चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराने की भी मांग उठाई गई है। परिजनों ने स्थानीय पुलिस की जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि न्यायहित में मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी, विशेष रूप से सीबीआई से कराई जानी चाहिए। उनका मानना है कि इससे पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने आ सकेगी और निर्दोष को न्याय मिल सकेगा। बागपत की सीओ सुकन्या शर्मा ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
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बागपत हत्या मामले में सीबीआई जांच की मांग:परिजनों ने पुलिस पर निर्दोष को फंसाने का आरोप लगाया