कुलपति का आदेश 12 दिन बाद भी लागू नहीं:बिना अनुमति संबद्ध कर्मचारी मूल कार्यस्थल पर नहीं लौटे, अधिकारी मौन


आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय में कुलपति का एक महत्वपूर्ण आदेश 17 जून 2026 को जारी किया गया था। इस आदेश का पालन 12 दिन बाद भी नहीं हो पाया है। यह आदेश बिना प्रशासनिक स्वीकृति के संबद्ध किए गए कर्मचारियों, शिक्षकों और वैज्ञानिकों की संबद्धता (अटैचमेंट) को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने से संबंधित था। आदेश के बावजूद, कई संबद्ध कर्मचारी अभी भी अपने पुराने विभागों और केंद्रों में कार्यरत हैं। उन्हें अपने मूल पद और कार्यस्थल पर वापस नहीं भेजा गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रशासनिक व्यवस्था में एकरूपता बनाए रखने और नियमानुसार कार्य संचालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सभी अनधिकृत संबद्धताओं को समाप्त करने का निर्णय लिया था। प्रशासनिक अनुभाग द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन में स्पष्ट किया गया था कि कुछ विभागों, केंद्रों और इकाइयों में अधिष्ठाताओं, निदेशकों और विभागाध्यक्षों ने सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना कर्मचारियों को अन्य विभागों से संबद्ध कर रखा था, जो नियमों के विरुद्ध था। आदेश में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के बिना की गई सभी संबद्धताएं तत्काल प्रभाव से स्वतः समाप्त मानी जाएंगी। संबंधित कर्मचारियों को अपने मूल पद और कार्यस्थल पर कार्यभार ग्रहण करने को कहा गया था। भविष्य में किसी भी नई संबद्धता के लिए पूर्ण औचित्य सहित प्रस्ताव सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद ही प्रभावी होगा। विश्वविद्यालय के निदेशक प्रशासन एवं परिवीक्षण डॉ. सुशांत श्रीवास्तव ने सभी संबंधित अधिकारियों को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद 12 दिन बीत जाने के बाद भी कई संबद्ध कर्मचारी अपने मूल विभागों में नहीं लौटे हैं, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्देशों की अनदेखी स्पष्ट होती है। चर्चा है कि कुछ विभागाध्यक्ष, डीन और निदेशक अपने चहेते कर्मचारियों को छोड़ने के पक्ष में नहीं हैं, जिसके चलते कुलपति के आदेश का प्रभाव धरातल पर नहीं दिख रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन अपने ही आदेश का पालन कब और कैसे सुनिश्चित कराएगा।

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