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कानपुर देहात में जन्म प्रमाण पत्र जारी करने में बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि झींझक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से ऐसे लोगों के भी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए, जिनका जन्म अस्पताल में दर्ज नहीं है। शिकायत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। मामला कानपुर देहात के झींझक सीएचसी से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, 9 फरवरी 2026 को एक ही दिन में 34 और 17 फरवरी 2026 को 38 जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए। इन प्रमाण पत्रों में जन्म का वर्ष 2010 से लेकर 2026 तक दर्शाया गया है। सबसे गंभीर बात यह है कि जिन लोगों के नाम पर ये प्रमाण पत्र जारी हुए हैं,उनका अस्पताल के जन्म रजिस्टर में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला है। ऐसे में सवाल उठता है कि बिना रिकॉर्ड के ये प्रमाण पत्र किस आधार पर जारी किए गए। दस्तावेजों से पता चला है कि इन प्रमाण पत्रों में कानपुर देहात के अलावा औरैया,कन्नौज, कानपुर नगर, हरदोई, रायबरेली और जालौन जैसे अन्य जिलों के लोगों के नाम भी शामिल हैं। नियमों के मुताबिक,यदि किसी सरकारी अस्पताल में बच्चे का जन्म होता है, तो एक वर्ष के भीतर वहीं से जन्म प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता है। एक वर्ष के बाद जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया अलग नियमों के तहत पूरी की जाती है। ऐसे में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में प्रमाण पत्र जारी होना पूरे मामले को संदिग्ध बनाता है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) जय गोविंद ने बताया कि झींझक और मैथा सीएचसी से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी होने की शिकायतें मिली हैं। एक जांच टीम गठित की गई है,जो यह सत्यापित कर रही है कि जिन लोगों के प्रमाण पत्र बने हैं, उनका जन्म वास्तव में संबंधित अस्पतालों में हुआ था या नहीं। जिलाधिकारी कपिल सिंह ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए कहा कि सीएमओ से रिपोर्ट मांगी गई है। नोडल अधिकारी और सीएचसी अधीक्षक द्वारा जांच कराई जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही अथवा अनियमितता पाई जाती है,तो नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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सीएचसी से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी होने का आरोप:जांच टीम गठित, कई जिलों के लोगों के नाम शामिल