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कानपुर का ‘बोतल बाबा’ सुर्खियों में है। आरोप है, महिला का बंद कमरे में इलाज करते हुए अश्लील हरकत की। हालांकि, उसके अनुयायियों का बाबा पर अब भी भरोसा है। वो कहते हैं- बाबा पानी छूकर अमृत बना देते हैं। इसे पीने से हर तरह की बीमारियां ठीक हो जाती हैं। बोतल बाबा का असली नाम हरिओम यादव है। 10 साल पहले तक वो कानपुर देहात की तहसील में आय और जाति प्रमाणपत्र बनवाने का काम करता था। सरकारी फीस के अलावा 100-150 रुपए ज्यादा लेकर कमाई करता था। एक दिन हरिओम भगवा कपड़े पहनकर गांव के लोगों के बीच पहुंचा। बोला- मेरे सपने में काली माता आई थीं। उन्होंने आदेश दिया कि भक्त लोगों की जिंदगी सुधारो, उनकी मदद करो। यहीं से शुरू होती है हरिओम की बोतल बाबा बनने की कहानी। उसने गांव में ही काली माता का मंदिर बनवाया। लोगों से कहने लगा- मुझे हरि धाम सरकार कहो। मंदिर में ही दरबार लगने लगा। पानी में फूंक मारकर बाबा कहता- इसको पी लो, ठीक हो जाओगे। लेकिन, महिला अनुयायी से छेड़छाड़ के मामले में पुलिस ने 19 जून को उसे अरेस्ट कर लिया। अब बोतल बाबा जेल में है और आश्रम बंद हैं। सपने में काली का आदेश बताकर कैसे हरिओम बाबा बना पिता किसान, खुद आय-जाति प्रमाणपत्र बनवाता था
कानपुर देहात जिला मुख्यालय से करीब 33 किमी दूर चैन का पुरवा गांव है। यहां के लोगों से बात करके समझ आया कि गांव का एक तबका बाबा को पाखंडी मानता है। जबकि, कई लोग चमत्कारी बताते हैं। गांववालों के मुताबिक, हरिओम के पिता खेती-बाड़ी करते थे। हरिओम पढ़ने में अच्छा नहीं था। घर पर ही पिता के साथ खेती-किसानी में हाथ बंटाता था। इसके बाद कानपुर देहात की तहसील में आय-जाति प्रमाणपत्र बनवाने का काम करने लगा। दिनभर में 500-600 रुपए कमा लेता था। गांव के लोग बताते हैं- 2015 की बात है। एक दिन हरिओम चौपाल पर आया। उसने लोगों को आवाज देकर इकट्ठा किया। कहा- रात में मेरे सपने में काली मां आई थीं। उन्होंने आदेश दिया है कि वो काम करो, जिसके लिए तुमने जन्म लिया है। इसके बाद गांव में ही काली माता का नया मंदिर बनाया गया। यहां पर हरिओम पूजा-पाठ करने लगा। वो लोगों की समस्याएं सुनकर उनकी मदद का दावा करने लगा। इस तरह 2017 तक आसपास के गांव में फेमस हो गया। यहां वो 3 तरह से लोगों को ठीक करने का दावा करता- धीरे-धीरे दूर-दूर के गांव से लोग आने लगे। जिस जगह काली मां का मंदिर है, उसके आसपास हरिओम ने आश्रम बनवा लिया। स्थापित देवी को ‘चैन की पुरवा वाली देवी’ कहने लगा। अपने दरबार में अक्सर इस नाम का जयकारा लगवाता था। 8 बीघे में आश्रम बनाया, यहीं दरबार लगाने लगा 2 दिन दरबार, यहां दूल्हे के कपड़े पहनकर बैठता
8 अगस्त, 2022 को हरिओम ने गांव में बड़ा आयोजन किया। आश्रम का उद्घाटन करने के लिए उसने हनुमानगढ़ी के भरत दास महराज, जननायक कर्पूरी सेना के अध्यक्ष श्याम नारायण औऱ इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस डॉ. आईएम कुद्दूसी को बुलाया। ये आश्रम गांव के पुत्तीलाल यादव की जमीन पर बनवाया गया था। आश्रम बनवाने के बाद हरिओम हर मंगलवार और शनिवार को दरबार लगाने लगा। लोगों के सामने सिंहासन पर बैठता था। इसमें वह कभी दूल्हे के कपड़े पहनता, तो कभी धोती-कुर्ते में आता था। शुरुआत में वह 100 रुपए की रसीद कटवाता था। आश्रम की दुकान से 20 रुपए की पानी की बोतल लेनी होती थी। हरिओम इसी पानी को छूकर अमृत बनाने का दावा करता था। अगर कोई अनुयायी कहता कि फायदा नहीं हुआ, तो कहता कि तुम्हारे ऊपर साया है। विशेष पूजा करवानी पड़ेगी। हरिओम के साथ रहने वाले लोग पूजा सामग्री लिखते और वहीं आश्रम से ही इसे खरीदना होता था। सामग्री की कीमत 3 से 5 हजार रुपए के बीच होती थी। गांव के लोग बताते हैं कि 2024 में जो रसीद 100 रुपए में कटती थी, अब वही 250 रुपए की हो गई है। आश्रम में ही हरिओम यादव की तस्वीर हरिधाम सरकार नाम से बनती थी। उसे भगवान के रूप में दिखाकर बेचा जाता था। अक्सर भक्त ये फोटो फ्रेम ले जाकर घर में लगाते थे। मुर्दे को जिंदा करने का दावा करता था बोतल बाबा इन दिनों हरिओम बाबा का एक वीडियो वायरल है। इसमें वह एक मरी हुए औरत को जिंदा करने का दावा करता है। वह कहता है- मैं न बाबा हूं, न भगत और न कोई तांत्रिक। न मेरा कोई गुरु है, न कोई कंठी माला पहनता हूं। ये जो सूर्य रहा और ये जो काली मां हैं, यही मेरे गुरु हैं। इसके बाद हाथ से जादू दिखाने जैसी हरकत करने लगता है। फिर लेटी हुई महिला उठ जाती है और लोग जय-जयकार करने लगते हैं। ये आदमी कौन था, इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। हरिओम के आश्रम से जुड़ा एक व्यक्ति कहता है- हरिओम के एक शिष्य मुंबई के थे। वे पुलिस में थे। उनके बेटे की अचानक मौत हो गई, इसके बाद ये वहां गया था। जिंदा नहीं कर पाया, तो कहा कि ये भगवान के चरणों में पहुंच गए हैं। अब वहां से बुलाना ठीक नहीं होगा। इसके बाद वापस अपने आश्रम आ गया। हरिओम काली मां के अलावा कभी बांकेबिहारी, शारदा भवानी तो कभी बालाजी को अपना गुरु बताने लगता। जयकारे भी लगवाता। आखिर हरिओम यादव फंसा कैसे? 5 जून को हरिओम औरैया में एक महिला के घर पहुंचा। उसका पति राजस्थान में काम करता था। ये घर महिला का मायका था। उसने अपने ससुरालवालों को भी बुलाया था। हवन-पूजन करने के बाद हरिओम ने कहा कि महिला के ऊपर भूत-प्रेत का साया है। हरिधाम आश्रम आना होगा। 15 जून को अमावस्या पर दरबार आने को कहा। महिला 15 जून को अपने दो देवरों के साथ आश्रम पहुंची। उसका कहना है कि झाड़-फूंक के लिए हरिओम उसे एक कमरे में ले गया और वहां छेड़छाड़ करने लगा। इसके बाद मैं बाहर की तरफ भागी। हरिओम भी बाहर आया। उसने कहा कि इसके ऊपर भूत-प्रेत का साया है, इसे कोड़े मारने पड़ेंगे। हरिओम ने महिला के देवरों और अपने भतीजे को कोड़े मारने का आदेश दिया। सभी महिला को कोड़े मारते रहे। वह रोते-छटपटाते हुए हाथ जोड़कर छोड़ने की गुहार लगाती रही। ये सब करीब 30 मिनट चलता रहा। इसके बाद महिला आश्रम से करीब 18 किलोमीटर दूर भोगनीपुर कोतवाली पहुंची और पुलिस को पूरी घटना बताई। फिर महिला का मेडिकल करवाया गया। हरिओम यादव, उसके भतीजे दीपक, शिष्य कुंदन, दोनों देवर रामवीर और सुखवीर के खिलाफ केस दर्ज हुआ। पुलिस ने हरिओम यादव और उसके भतीजे को गिरफ्तार कर लिया। हरिओम का कहना है- सारे आरोप झूठे हैं। सनातनियों पर आरोप लगते रहते हैं। दिबियापुर के नेता आशीष द्विवेदी मुझे फंसा रहा है। मेरा कोई छोटा-मोटा आश्रम नहीं है, 8 बीघे में बना है। कोर्ट में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… राम मंदिर चढ़ावा चोरी-SIT को सोने-चांदी का रिकॉर्ड नहीं मिला, अफसरों के हाथ शिफ्ट हो सकता है मैनेजमेंट; टिन्नू से फिर लंबी पूछताछ श्रीराम जन्मभूमि मंदिर का चढ़ावा चोरी मामले में SIT 4 दिन से जांच कर रही है। इसमें सामने आया कि पूरे मंदिर का मैनेजमेंट 3 सदस्य- चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव देख रहे थे। मंदिर की व्यवस्थाओं में किसी दूसरे पदाधिकारी का दखल उन्हें पसंद नहीं था। यही तीनों सदस्य चढ़ावा गिनने और फिर उसके बैंक में डिपॉजिट होने तक का मैनेजमेंट संभालते थे। पढ़िए पूरी खबर…
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