जालौन में 48 घंटे में चार जच्चा-बच्चों की मौत:निजी अस्पतालों और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल


जालौन के कुठौंद कस्बे में पिछले 48 घंटों के भीतर चार जच्चा-बच्चों की मौत के मामले सामने आने से क्षेत्र में चिंता का माहौल है। लगातार हो रही इन घटनाओं ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सिरसा कलार थाना क्षेत्र के गुपलापुर गांव की रिजवाना (30) का है। परिजनों के अनुसार प्रसव के लिए उन्हें कस्बे के एक निजी क्लीनिक में भर्ती कराया गया था। प्रसव के बाद नवजात की मौत हो गई, जबकि अत्यधिक रक्तस्राव के कारण रिजवाना की हालत बिगड़ गई। परिजनों का आरोप है कि हालत गंभीर होने पर क्लीनिक प्रबंधन ने उन्हें दूसरे अस्पतालों में भेज दिया। बाद में कानपुर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही रिजवाना ने दम तोड़ दिया। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन परिजनों की ओर से कोई लिखित शिकायत न दिए जाने के कारण आगे की कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकी। क्लीनिक में जच्चा-बच्चा की मौत गौरतलब है कि इससे पहले भी कुठौंद के एक निजी क्लीनिक में जच्चा-बच्चा की मौत का मामला सामने आया था। उस घटना के बाद परिजनों ने हंगामा किया था और पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया था। इसी तरह कुछ माह पूर्व इटाहा कालपी गांव निवासी ज्योति की भी एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया था, लेकिन छह माह बीत जाने के बावजूद मामले में अभी तक कोई मुकदमा दर्ज नहीं हो सका है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं को लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है। उनका कहना है कि निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली की गहन जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। फिलहाल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन मामलों की जांच और संभावित कार्रवाई को लेकर लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।

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