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वाराणसी में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्णा ने कहा कि राम मंदिर अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन और हेराफेरी की जांच के लिए राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। चढ़ावे और दान में कथित गबन के मामलों की जांच के लिए गठित एसआईटी (SIT) अपना काम कर रही है, यह टीम मामले की निष्पक्ष जांच कर रही है। और सरकार ने अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है राम मंदिर में चोरी प्रकरण की रिपोर्ट जल्द आएगी, कुछ कार्रवाई और सुझाव मांगे गए थे उसे पूरा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं के अपने ट्रस्ट हैं और उनकी व्यवस्थाएं हैं, इसमें हम सीधे दखल नहीं करते लेकिन किसी भी ट्रस्ट के खिलाफ शिकायत आने पर जांच की जाएगी।
यूपी डीजीपी ने वाराणसी दौरे के दूसरे दिन पुलिस लाइन का दौरा कर कानून व्यवस्था की समीक्षा की। इसके बाद मेयर, विधायकों, जिला पंचायत अध्यक्ष समेत जनप्रतिनिधियों से मुलाकात की। उनसे संवाद के दौरान बनारस की कानून व्यवस्था पर सवाल किए। काशी विश्वनाथ मंदिर की सुरक्षा, घाटों पर सतर्कता, ट्रैफिक की दुश्वारियां और पार्किंग समेत कई पहलुओं पर चर्चा की गई। प्रदेश की कानून व्यवस्था की समीक्षा के बाद पुलिसिंग पर पत्रकारों से संवाद किया। उन्होंने कहा कि यूपी से माफियाओं का सफाया हो चुका है, सोशल मीडिया के माध्यम से दहशत फैलाने वाले या ‘दबंगई’ दिखाने वाले असामाजिक तत्वों पर पुलिस की पैनी नजर है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। प्रदेश में अपराध नियंत्रण और महिलाओं की सुरक्षा के मोर्चे पर बेहतर परिणाम मिल रहे हैं। प्रदेश, जोन, जिले और यहां तक कि मोहल्ला स्तर के बदमाशों पर पुलिस की लगातार निगरानी है। ऐसे तमाम लोग सीधे हवालात में मिलेंगे। उत्तर प्रदेश में माफिया किसी भी कीमत पर पनप नहीं पाएंगे। पिछले आठ से दस वर्षों में माफियाओं के खिलाफ व्यापक कार्रवाई हुई है और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। महिला सुरक्षा, नागरिकों और व्यापारियों की सुरक्षा पर फोकस है। कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना, यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना तथा साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पुलिस की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल हैं। 20 जिलों में “रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन” योजना डीजीपी राजीव कृष्णा ने बताया कि प्रदेश के 20 जिलों में करीब ढाई माह पहले “रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन” योजना शुरू की गई है। इस योजना के तहत तकनीक की मदद से यातायात संबंधी समस्याओं का विश्लेषण किया जा रहा है। गूगल से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे ट्रैफिक प्रभावित मार्गों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके। वाराणसी में 11 प्रमुख ट्रैफिक कॉरिडोर और मार्गों की पहचान की गई है, जहां जाम की समस्या अधिक रहती है। प्रदेश में लगभग 230 ऐसे कॉरिडोर चिह्नित किए गए हैं। इन मार्गों पर वाहनों की गति, जाम की स्थिति, अधिकतम, न्यूनतम और औसत यात्रा समय का डेटा लगातार एकत्र किया जा रहा है। पिछले एक सप्ताह, दो सप्ताह और एक माह के आंकड़ों का विश्लेषण कर यातायात सुधार की रणनीति बनाई जा रही है। डीजीपी ने कहा कि तकनीक आधारित इस व्यवस्था से ट्रैफिक प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा तथा लोगों को जाम से राहत मिलेगी। इस दौरान पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल और एडीजी जोन पीयूष मोर्डिया भी उपस्थित रहे।
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राममंदिर प्रकरण में निष्पक्ष जांच रिपोर्ट देगी SIT:डीजीपी बोले-विदेशों से प्रत्यर्पण प्रोसेस में, हवालात में मिलेंगे भौकाली रीलबाज