UP के 22 जिलों में तेज हवा-बारिश का अलर्ट:3.4 MM हुई बारिश, अगले 1 सप्ताह बढ़ेगा तापमान; जालौन रहा सबसे गर्म


यूपी के 22 जिलों में मौसम विभाग में तेज हवा के साथ हल्की बारिश का अलर्ट जारी किया है। मौसम वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि हरियाणा के आसपास एक्टिव हुआ पश्चिमी विक्षोभ मध्य पाकिस्तान से बांग्लादेश तक जाती हुई दिखाई दी है। इस कारण अलग-अलग हिस्सों में पिछले तीन दिनों से आंधी तूफान के साथ हुई बारिश का सिलसिला 14 जून से कमजोर हो जायेगा। उन्होंने बताया कि अब अगले एक सप्ताह तक लगातार तापमान में वृद्धि होगी। इसी क्रम में अभी उत्तर प्रदेश में मानसून के अग्रसरण के लिए अभी परिस्थितियाँ अनुकूल नहीं हैं। बारिश की तस्वीरें देखिए- यूपी में मानसून में कम बारिश की संभावना की वजह जानिए
मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा ने बताया कि इस साल प्रशांत महासागर में ला नीना जैसी स्थितियां खत्म होकर अल नीनो की ओर बढ़ने के संकेत हैं। जो कम वर्षा का कारण बनेगी। यानी इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कमजोर रहने के संकेत हैं। साथ ही इस साल जनवरी-मार्च में उत्तरी गोलार्ध में बनी कम बर्फ भी मानसून को प्रभावित कर सकती है। खेती-किसानी पर होगा असर, महंगाई बढ़ेगी
यूपी में अल-नीनो की वजह से कम बारिश का सीधा असर राज्य की इकोनॉमी, खेती-किसानी और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ेगा। धान जैसी फसलों के उत्पादन में 20% तक की कमी आ सकती है। जून-जुलाई में बारिश न होने से धान की रोपाई में देरी हो सकती है। रकबा भी घट सकता है। सिंचाई के लिए किसानों को ट्यूबवेल पर निर्भर रहना पड़ेगा। बिजली और डीजल का खर्च बढ़ने से खेती की लागत बहुत ज्यादा बढ़ सकती है। उत्पादन घटने से अनाज, दालों और सब्जियों के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं। बुंदेलखंड और दक्षिण-पश्चिमी यूपी के जिलों (जैसे झांसी, महोबा, ललितपुर, मथुरा) में सूखे की आशंका गहरा सकती है। तेज आंधी और बारिश का अलर्ट
प्रयागराज, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, चंदौली, वाराणसी, संत रवि दास नगर, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, संत कबीर नगर, बस्ती, गोंडा, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, अयोध्या, अंबेडकर नगर एवं आस पास के क्षेत्र। अगले 5 दिन कैसा रहेगा मौसम… यूपी में जून से सितंबर के बीच 8% बारिश कम होगी
सीनियर साइंटिस्ट अतुल सिंह बताते हैं- इस साल यूपी समेत पूरे देश में सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। आमतौर पर यूपी में जून से सितंबर के बीच करीब 820 से 840 मिलीमीटर बारिश होती है। लेकिन, इस साल 8% कम यानी लगभग 754 से 773 मिलीमीटर तक ही पानी बरसेगा। यूपी में मानसून में कम बारिश की संभावना की वजह जानिए
मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. एम महापात्रा ने बताया कि इस साल प्रशांत महासागर में ला नीना जैसी स्थितियां खत्म होकर अल नीनो की ओर बढ़ने के संकेत हैं। जो कम वर्षा का कारण बनेगी। यानी इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कमजोर रहने के संकेत हैं। साथ ही इस साल जनवरी-मार्च में उत्तरी गोलार्ध में बनी कम बर्फ भी मानसून को प्रभावित कर सकती है। खेती-किसानी पर होगा असर, महंगाई बढ़ेगी
यूपी में अल-नीनो की वजह से कम बारिश का सीधा असर राज्य की इकोनॉमी, खेती-किसानी और आम लोगों की जिंदगी पर पड़ेगा। धान जैसी फसलों के उत्पादन में 20% तक की कमी आ सकती है। जून-जुलाई में बारिश न होने से धान की रोपाई में देरी हो सकती है। रकबा भी घट सकता है। सिंचाई के लिए किसानों को ट्यूबवेल पर निर्भर रहना पड़ेगा। बिजली और डीजल का खर्च बढ़ने से खेती की लागत बहुत ज्यादा बढ़ सकती है। उत्पादन घटने से अनाज, दालों और सब्जियों के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं। बुंदेलखंड और दक्षिण-पश्चिमी यूपी के जिलों (जैसे झांसी, महोबा, ललितपुर, मथुरा) में सूखे की आशंका गहरा सकती है। यूपी में पिछले 10 साल में मानसून कब आया, ग्राफिक्स में देखिए पिछले साल 10 से 15% ज्यादा बरसा था मानसून मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, उत्तर प्रदेश में 2025 के मानसून सीजन (जून से सितंबर) के दौरान औसतन 870 से 900 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। यह सामान्य मानसूनी औसत से करीब 10 से 15 प्रतिशत अधिक रही

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