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रामगढ़ताल में स्पीड बोट पर रोमांच का मजा लेने के लिए रोज हजारों लोग आते हैं लेकिन यहां सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। लाइफ जैकेट के सहारे जैसे-तैसे सुरक्षा का दावा किया जाता है लेकिन पानी में कोई हादसा हुआ तो बचाने वाले नहीं मिलेंगे। लोगों का कहना है कि इतना लोकप्रिय पर्यटन स्थल होने के कारण यहां जल पुलिस की तैनाती होनी चाहिए।
शहर के प्रमुख पर्यटन केंद्र रामगढ़ताल में सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शुक्रवार को एक छात्रा के ताल में कूदने के बाद हुई मौत ने न केवल ताल के बाहरी हिस्से बल्कि ताल के भीतर मौजूद सुरक्षा इंतजामों की हकीकत भी सामने ला दी है। प्रतिदिन हजारों स्थानीय लोगों और पर्यटकों की मौजूदगी के बावजूद यहां किसी बड़े जल हादसे से निपटने के लिए न तो एसडीआरएफ या एनडीआरएफ की स्थायी टीम तैनात है, न ही पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित गोताखोर और जल पुलिस उपलब्ध है। करीब 1700 एकड़ में फैले रामगढ़ताल में संचालित मोटर बोटिंग व्यवस्था भी कई सवाल खड़े कर रही है। प्लेटफार्म नंबर 1, 4, 5 और छह से चलने वाली स्पीड मोटर बोटों पर चालक और कर्मचारी अक्सर स्टंट करते दिखाई देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार बोट चालक यात्रियों के सामने तेज रफ्तार और खतरनाक मोड़ लेकर रोमांच पैदा करने की कोशिश करते हैं। दिन के समय यह भी सामने आया कि कई मौकों पर यात्रियों ने लाइफ जैकेट तक नहीं पहनी होती। सुरक्षा नियमों के इस असमान अनुपालन ने व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल लाइफ जैकेट सुरक्षा की गारंटी नहीं है। बड़े जलाशयों में प्रशिक्षित चालक, प्राथमिक उपचार किट, मौसम की लगातार निगरानी, आपातकालीन संचार तंत्र और तत्काल राहत-बचाव टीम की उपलब्धता जरूरी होती है। रामगढ़ताल में इनमें से अधिकांश व्यवस्थाएं नदारद हैं। रामगढ़ताल में पहले भी कई घटनाएं हो चुकी हैं। दो वर्ष पूर्व दो मोटर बोटों की टक्कर में एक ही परिवार के पांच से छह लोग घायल हो गए थे। उस समय पास से गुजर रही क्रूज और अन्य नाव चालकों की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया था। इससे पहले एक मोटर बोट फ्लोटिंग रेस्त्रां के पिलर से भी टकरा चुकी है। इन घटनाओं के बाद जांच और कार्रवाई के दावे हुए, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव दिखाई नहीं दिया।
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रामगढ़ताल में खतरे से निपटने के इंतजाम नहीं:रोज आते हैं हजारों पर्यटक; पानी में हादसा हुआ तो बचाने का नहीं है इंतजाम