CSJMU Kanpur Yoga Pakhwada Launch; Courses for Earning & Better Life

दीपेंद्र द्विवेदी | कानपुर2 मिनट पहले

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छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) और नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) ने मिलकर शहर में योग की एक बड़ी मुहिम शुरू की है। यूनिवर्सिटी के तात्या टोपे सभागार में ‘योग पखवाड़े’ की शुरुआत की गई।

आने वाले दिनों में इसके तहत पूरे शहर में योग शिविर, हेल्थ वर्कशॉप और लोगों को जागरूक करने के कार्यक्रम चलाए जाएंगे। कार्यक्रम में जुटे जानकारों ने एक सुर में माना कि अगर आज के समाज को सेहतमंद रखना है, तो हमें अपनी पुरानी योग और आयुर्वेद की परंपरा की तरफ लौटना ही होगा।

तनाव से मुक्ति और कमाई का जरिया बनेंगे योग कोर्स

यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने युवाओं को योग से जुड़ने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि योग सिर्फ शरीर को हिलाने-डुलाने या व्यायाम करने का नाम नहीं है, बल्कि यह पूरी इंसानियत को जोड़ने का जरिया है।

उन्होंने यूनिवर्सिटी में चल रहे बीएससी, एमएससी और पीजी डिप्लोमा जैसे योग कोर्स का जिक्र करते हुए कहा कि ये कोर्सेज सिर्फ कागज की डिग्री नहीं हैं। इनसे युवाओं का मानसिक और आध्यात्मिक विकास तो होता ही है, साथ ही यह उनके लिए कमाई और रोजगार का भी एक शानदार जरिया बन रहे हैं। योग से एकाग्रता बढ़ती है और जीने का अंदाज बदल जाता है।

थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था’, बूढ़े होने की रफ्तार को धीमा करेगा योग

इस बार योग दिवस की थीम ‘स्वस्थ वृद्धावस्था के लिए योग’ रखी गई है। इस पर बात करते हुए प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने बताया कि बढ़ती उम्र में भी खुद को एक्टिव और सम्मानित बनाए रखने के लिए योग सबसे बड़ा सहारा है।

आज की नई रिसर्च भी मान चुकी हैं कि जो लोग रोज योग करते हैं, उन पर बुढ़ापे का असर देर से होता है। वहीं, आयुर्वेद अधिकारी डॉ. कप्तान सिंह ने कहा कि सही खान-पान और योग को अगर दिनचर्या में शामिल कर लिया जाए, तो आधी बीमारियां वैसे ही खत्म हो जाएंगी।

मंत्र पढ़कर भोजन करने से बदल जाती है उसकी एनर्जी

कार्यक्रम में एक अनोखा प्रैक्टिकल भी देखने को मिला। नीमा वूमेन फोरम की सचिव डॉ. वंदना पाठक ने एक खास मशीन के जरिए दिखाया कि हमारे सोचने का तरीका खाने पर कैसा असर डालता है। उन्होंने बताया कि अगर हम गुस्से या तनाव में खाना खाते हैं, तो वह शरीर को नुकसान पहुंचाता है।

वहीं, अगर भोजन करने से पहले शांत मन से भगवान का ध्यान या मंत्रोच्चारण किया जाए, तो खाने की क्वालिटी और उसकी ऊर्जा सकारात्मक हो जाती है। ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर मिल रहा है एडमिशन

योग पखवाड़े के समन्वयक डॉ. रामकिशोर ने बताया कि यूनिवर्सिटी के योग कोर्स में एडमिशन का आखिरी दौर चल रहा है। जो छात्र योग में अपना करियर बनाना चाहते हैं, उन्हें ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर सीटें दी जा रही हैं।

उद्घाटन कार्यक्रम के बाद ईशा फाउंडेशन की टीम ने वहां मौजूद छात्रों और शिक्षकों को ध्यान (मेडिटेशन) लगाने के गुर सिखाए। इस दौरान इस्कॉन, गायत्री परिवार और ब्रह्माकुमारी जैसी संस्थाओं के लोग भी मौजूद रहे, जिन्होंने युवाओं को अच्छे संस्कार और नैतिकता से जोड़ने का संकल्प लिया।

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