![]()
लखनऊ की संस्था ‘विजय बेला एक कदम खुशियों की ओर’ ने संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से ऐतिहासिक नाटक ‘वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई’ का मंचन किया। यह प्रभावशाली प्रस्तुति के.एस. ग्राण्ड होटल, शारदा नगर कानपुर में हुई, जिसने दर्शकों को स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास से जोड़ा। महेंद्र भीष्म द्वारा लिखित और चन्द्रभाष सिंह के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने शुरुआत से अंत तक दर्शकों को बांधे रखा। मंच पर जैसे ही रानी लक्ष्मीबाई का प्रसिद्ध उद्घोष ‘मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी’ गूंजा, पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष की कहानी को दिखाया नाटक में बालिका मनिकर्णिका के साहसी व्यक्तित्व से लेकर झांसी की महारानी बनने और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष की कहानी को बेहद प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों के दमदार संवाद, युद्ध के रोमांचक दृश्य और जीवंत अभिनय ने दर्शकों को भावुक कर दिया। प्रस्तुति में रानी लक्ष्मीबाई के साथ तात्या टोपे, नाना साहेब और अन्य क्रांतिकारियों के संघर्ष को भी सशक्त तरीके से दिखाया गया। नाटक केवल ऐतिहासिक घटनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रभक्ति, आत्मसम्मान और नारी सशक्तिकरण का संदेश भी देता नजर आया। अंतिम दृश्य में रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान दर्शकों की आंखें नम कर गया और सभागार देर तक तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। इन कालकारों ने शानदार अभिनय किया नाटक में लावण्या बाजपेई, लता बाजपेई, शालू तिवारी, वैष्णवी श्रीवास्तव, हर्षिका श्रीवास्तव, कृष्ण कुमार पांडेय, मुकुल कुमार, उज्ज्वल सिंह, अभय प्रताप सिंह, मृत्युंजय प्रकाश, प्रेम कुमार, अनूप जायसवाल, आनंद तिवारी, तनय श्रीवास्तव, उन्नत बहादुर सिंह और अभिषेक कुमार ने विभिन्न भूमिकाओं में प्रभावशाली अभिनय किया। जूही कुमारी ने सह-निर्देशन तथा सचिन जायसवाल ने मुख-सज्जा की जिम्मेदारी संभाली।
Source link
'वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई' नाटक का मंचन:संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से संस्था विजय बेला ने किया प्रस्तुत