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बलिया में बाढ़ से गांवों को बचाने के लिए नौ परियोजनाओं पर काम चल रहा है। महाराजपुर और चांदपुर में सरयू नदी के किनारे चल रही दो परियोजनाओं पर ग्रामीणों ने कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गलत तरीके से हो रहे इन कार्यों से गांव सुरक्षित नहीं रहेंगे। चांदपुर निवासी जेपी सिंह ने बताया कि यहां जो भी कार्य हो रहा है, वह गलत तरीके से हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार बताने के बावजूद भी गुणवत्तापूर्ण काम नहीं किया जा रहा है। सिंह के अनुसार, यदि एक मजबूत ठोकर बांध बनाया जाए तो गांव बच सकता है, लेकिन वर्तमान कार्य से गांव जल्दी ढह जाएगा। उन्होंने काम बंद करने की मांग की। रवि सिंह ने कहा कि पर्कोपाइन विधि से यहां कटाव नहीं रुकेगा और बिना ठोकर के यह संभव नहीं है। उन्होंने अधिकारियों के ‘प्राकृतिक नाला’ के दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह कटाव से बना है। रवि सिंह ने यह भी बताया कि दो ठोकरों के बीच की दूरी 35 मीटर होनी चाहिए, लेकिन यहां 150 मीटर की दूरी दी गई है। मन्नू सिंह ने आरोप लगाया कि बोरियों में बालू की जगह मिट्टी भरी जा रही है और यह काम केवल ‘टाइम पास’ है। मन्नू सिंह ने आगे कहा कि ठेकेदार गांव के ढहने की परवाह नहीं करते, वे केवल पैसा कमाने आए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले साल भी पांच ठोकर बनाए गए थे, लेकिन पानी बढ़ने पर वे बह गए थे। उन्होंने यह भी शिकायत की कि बोरियां सही अनुपात में नहीं डाली जा रही हैं और उन्हें ठीक से भरा भी नहीं जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि पिछले तीन दिनों से कोई काम नहीं हुआ है। अधिकारियों से पूछने पर उन्हें बताया गया कि मजदूर अयोध्या से आ रहे हैं। ग्रामीणों ने मौके पर मौजूद जेई पवन कुमार और अमित कुमार से भी कार्य के प्रति कड़ा विरोध दर्ज कराया। मौके पर मौजूद जेई पवन कुमार ने ऑफ कैमरा बताया कि आज से पर्कोपाइन विधि से कार्य शुरू हो जाएगा।
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बलिया में बाढ़ परियोजनाओं में लापरवाही का आरोप:लोग बोले- मानक दरकिनार कर दूर बनाई जा रहीं ठोकरों, शारदा में बह जाएगा गांव