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उन्नाव के शुक्लागंज स्थित अवधपुरी नाथूखेड़ा वार्ड-12 निवासी देवी प्रसाद मौर्य पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं। इवेंट मैनेजमेंट से जुड़े देवी प्रसाद ने अपने घर की छत को एक मिनी नर्सरी में बदल दिया है, जहां 150 से अधिक गमलों में फूल, सब्जियां और औषधीय पौधे लहलहा रहे हैं। देवी प्रसाद बताते हैं कि उनके पिता एस.एन. सेन बालिका डिग्री कॉलेज से माली पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। बचपन से पौधों के बीच रहने और पिता की प्रेरणा ने ही उन्हें बागवानी की ओर मोड़ा। आज यही शौक एक बड़े पर्यावरण संदेश में बदल चुका है। गुलाब-गेंदा से लेकर सब्जियों तक, छत बनी हरी दुनिया छत पर गेंदा, गुलाब, गुड़हल, मोगरा, चंपा और चांदनी जैसे फूलों के साथ-साथ बैंगन, टमाटर, धनिया और मिर्च जैसे सब्जी पौधे भी उगाए गए हैं। साथ ही कई औषधीय पौधे भी यहां मौजूद हैं, जिससे यह छत एक छोटी जैव विविधता का केंद्र बन गई है। खास बात यह है कि देवी प्रसाद ने महंगे गमलों की जगह प्लास्टिक गैलेन, बोतलें, धूपबत्ती पैकेट, हैंडवॉश डिब्बे और पुराने टायरों का उपयोग कर उन्हें गमलों में बदल दिया। इस पहल से जहां कचरे का पुनः उपयोग हुआ, वहीं पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश भी गया। मोहल्ले और कोतवाली में भी रोपे 60 से अधिक पौधे देवी प्रसाद ने केवल अपने घर तक ही हरियाली सीमित नहीं रखी। उन्होंने गंगाघाट कोतवाली परिसर और मोहल्ले में भी 50-60 पौधे लगाए हैं। वे समय-समय पर लोगों को पौधे वितरित कर पर्यावरण के प्रति जागरूक करते रहते हैं।
‘महंगे शौक नहीं, अच्छी सोच जरूरी’ देवी प्रसाद का कहना है कि बागवानी कोई महंगा शौक नहीं, बल्कि सोच का परिणाम है। उन्होंने अपील की कि हर व्यक्ति अपने जन्मदिन या विशेष अवसर पर एक-दो पौधे जरूर लगाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण मिल सके।
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उन्नाव के युवक ने कबाड़ से बनाया हरियाली का संसार:विश्व पर्यावरण दिवस पर बने प्रेरणा स्रोत, छत पर उगाए 150 से अधिक पौधे