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हाथरस के बहुचर्चित सत्संग भगदड़ मामले में गुरुवार को न्यायालय में एक उपनिरीक्षक की गवाही दर्ज की गई। यह मामला 2 जुलाई 2024 को सिकंद्राराऊ के फुलरई में ‘भोले बाबा’ के सत्संग के बाद हुई भगदड़ से संबंधित है, जिसमें 121 लोगों की मौत हुई थी और डेढ़ सौ से अधिक लोग घायल हुए थे। हाथरस जंक्शन कोतवाली के वरिष्ठ उप निरीक्षक लखमी सिंह ने गवाह के तौर पर बयान दर्ज कराए। आरोपी पक्ष के अधिवक्ता मुन्ना सिंह पुंडीर ने बताया कि उपनिरीक्षक लखमी सिंह ने अपने बयान में कहा कि उन्हें 2 जुलाई 2024 को भगदड़ में मृत लोगों के पंचायतनामा संबंधी कार्यवाही के लिए जिला अस्पताल हाथरस भेजा गया था। उन्होंने मृतका रामादेवी पत्नी हरीशरन, प्रेमा देवी पत्नी रमेश चंद्र और रामादेवी पत्नी चंद्रपाल के शवों का पंचायतनामा एक कांस्टेबल और एक महिला कांस्टेबल की सहायता से पूरा कराया। यह कार्यवाही पूरी होने के बाद शवों का नियमानुसार पोस्टमार्टम कराया गया और बाद में परिजनों को सौंप दिया गया। बचाव पक्ष के अधिवक्ता मुन्ना सिंह पुंडीर द्वारा जिरह के दौरान पूछे गए सवालों के जवाब में गवाह ने स्पष्ट किया कि मृतकों के शव पर कोई जाहिरा चोट नहीं थी। उन्होंने बताया कि महिलाओं की मृत्यु का कारण भगदड़ में गिरना है, कोई मारपीट इत्यादि नहीं। सभी आरोपियों की हो चुकी है जमानत.. अदालत ने उपनिरीक्षक की गवाही दर्ज कर ली है। मामले की अगली सुनवाई 11 जून को होगी। इस मामले में पुलिस देव प्रकाश मधुकर सहित कुल 11 लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है। सभी आरोपी फिलहाल जमानत पर हैं।
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हाथरस भगदड़ मामले में दरोगा की गवाही:मृतकों के पंचायतनामा संबंधी कार्रवाई पर बयान, 11 जून को होगी अगली सुनवाई