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लखनऊ के गोमतीनगर स्थित लखनऊ पब्लिक स्कूल में बच्चों को विशेष नृत्य एवं संगीत कार्यशाला के तहत प्रशिक्षित किया जा रहा है। इस कार्यशाला में विद्यार्थी कथक की मुद्राओं और तालों के साथ-साथ तबला, हारमोनियम और ढोलक जैसे वाद्य यंत्रों का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर रहे हैं। प्रसार भारती से बी-ग्रेड मान्यता प्राप्त कथक नृत्यांगना रजनी वर्मा इस पहल का नेतृत्व कर रही हैं। भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय से मास्टर डिग्री और ब्रॉन्ज मेडल प्राप्त रजनी बच्चों को कथक की बारीकियां सरल और रोचक ढंग से सिखाती हैं। कक्षा में बच्चे उत्साहपूर्वक सवाल पूछते हैं और नई जानकारी प्राप्त करते हैं। कथक केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि एक संपूर्ण कला रजनी वर्मा के अनुसार, कथक केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि एक संपूर्ण कला है, जिसमें संगीत, लय, ताल और अभिव्यक्ति का अद्भुत समन्वय होता है। उनका मानना है कि यदि बच्चे कम उम्र से ही कथक के साथ वाद्य संगीत भी सीखें, तो उनके लिए भविष्य में कई करियर विकल्प खुल सकते हैं। उन्होंने बताया कि कथक, तबला, हारमोनियम और ढोलक का ज्ञान रखने वाले विद्यार्थी भविष्य में संगीत शिक्षक, मंच कलाकार, कार्यशाला प्रशिक्षक या संगीत निर्देशक के रूप में करियर बना सकते हैं। इस क्षेत्र में मेहनत और निरंतर अभ्यास से अच्छी आय के अवसर भी उपलब्ध हैं। आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर रजनी के मुताबिक, 5 से 6 वर्ष की आयु से शुरू की गई संगीत साधना बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास और रचनात्मकता का विकास करती है। ये गुण उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर करते हैं।स्कूल प्रबंधन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि कला और संगीत बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कथक और वादन का यह संयुक्त प्रशिक्षण विद्यार्थियों को एक संपूर्ण कलाकार बनने की दिशा में प्रेरित कर रहा है।
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लखनऊ पब्लिक स्कूल में कथक और संगीत कार्यशाला:बच्चों में निखर रही कला प्रतिभा, सीख रहे तबला, हारमोनियम और ढोलक