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हिमाचल प्रदेश में हाल में संपन्न पंचायत और शहरी निकाय चुनावों में युवाओं की भागीदारी बढ़ी है। मगर ज्यादा पढ़े-लिखे नेता स्थानीय राजनीति में नहीं आ रहे। स्टेट इलेक्शन कमीशन के अनुसार, 63 फीसदी जनप्रतिनिधि केवल 10वीं पास या इससे कम पढ़े-लिखे चुनाव जीते हैं। राज्य में 443 (1.43%) जनप्रतिनिधि अनपढ़, 13 हजार 786 (44.46%) मैट्रिक पास और 5 हजार 748 (18.54%) 10वीं से भी कम पढ़े-लिखे विजयी रहे। पंचायतों में चुने गए 31 हजार 002 जनप्रतिनिधियों में से एमए डिग्रीधारक केवल 1 हजार 251 (4.03%), ग्रेजुएट 2 हजार 601 (8.39%) और 7 हजार 177 (23.15%) 12वीं पास हैं।
21 से 30 साल के युवाओं की राजनीति में एंट्री पंचायत चुनाव में 21 से 30 साल के 13% युवा और 31 से 40 साल आयु वर्ग के 10 हजार 848 (34.99%) प्रतिनिधि चुनाव जीतकर आए हैं। आंकड़े बताते हैं कि युवाओं की राजनीति में दिलचस्पी बढ़ी है। इसी तरह, 31 से 40 वर्ष आयु वर्ग के उम्मीदवारों को भी जनता ने स्थानीय नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी है। शहरी निकायों में 41 से 50 साल के नेताओं का दबदबा वहीं, शहरी निकायों में 41 से 50 साल के नेताओं का ज्यादा दबदबा है। राज्य में इस बार पंचायत चुनाव में लगभग 31,002 प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य, बीडीसी सदस्य और जिला परिषद सदस्य चुने गए, जबकि नगर परिषदों व नगर पंचायतों में 400 पार्षद और 4 नगर निगमों में 63 पार्षद चुनाव जीतकर आए हैं। पुरुषों की तुलना में 26% ज्यादा महिलाएं चुनी गईं राज्य के 4 नगर निगमों में पुरुषों की तुलना में महिलाओं का बोलबाला है। सोलन, मंडी, पालमपुर और धर्मशाला में 63.49% महिलाएं पार्षद चुनी गई हैं, जबकि पंचायतों में लगभग 54% महिलाओं को कमान मिली है। हालांकि, महिलाओं की अधिक भागीदारी में 50% आरक्षण की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। इसके बावजूद कई जगह महिलाएं अनारक्षित (ओपन) सीटों से भी चुनाव जीतकर आई हैं। स्थानीय राजनीति में गरीब वर्ग की भागीदारी कम स्टेट इलेक्शन कमीशन के आंकड़े बताते हैं कि स्थानीय राजनीति में गरीब वर्ग की भागीदारी अपेक्षाकृत कम है। पंचायतों में बीपीएल परिवारों से संबंध रखने वाले 6.08% जनप्रतिनिधि और शहरी निकायों में मात्र 1.6% पार्षद चुनाव जीतकर आए हैं। वहीं, पंचायतों में 198 टैक्सपेयर, नगर परिषद व नगर पंचायतों में 83 और चार नगर निगमों में 13 टैक्सपेयर चुनाव जीतकर आए हैं।
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हिमाचल पंचायत चुनाव में 443 नेता अनपढ़ जीते:63% जनप्रतिनिधि 10वीं या इससे कम पढ़े-लिखे, 21-30 साल के 13% युवाओं को कमान; महिलाओं का दबदबा