कानपुर शहर के दादानगर इंडस्ट्रियल एरिया में स्थित PARLE-G बिस्किट फैक्ट्री के बाहर शुक्रवार को मजदूरों ने हंगामा किया। मजदूरों का कहना है, यहां 12 घंटे काम के 9000 रुपए दिये जाते है, जबकि कोई ओवरटाइम का पेमेंट नहीं किया जाता है। इन मांगों को लेकर सैक
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देखिए प्रदर्शन की तस्वीरें

प्रदर्शनकारियों ने कहा- हमारी मांगे पूरी करो, भृस्टाचार बंद करो

प्रदर्शनकारी 8 घंटे काम की मांग करते रहे
प्रदर्शन कर रहे एक महिला कर्मचारी का कहना है, यहां लंबे समय से काम कर रहे है, लेकिन सैलरी नहीं बढाई गई है। सरकार के द्वारा जारी सैलरी भी नहीं दी जा रही है। अभी तक हम लोगों से 8 घंटे की बजाय 12 घंटे काम कराया जा रहा है। ओवर टाइम का कोई अलग से कोई पेमेंट नहीं दिया जाता है । मजदूरों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। इससे नाराज कर्मचारियों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कर्मचारियों ने मांग की है, उन्हे उनके कार्य के अनुरूप वेतन और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं, जिससे उनके सामने आर्थिक समस्याएं बढ़ रही हैं।

महिला प्रदर्शनकारी ने बताया- 12 घंटे काम के 9 हजार मिलते है
प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने सड़क पर बैठकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस कारण फैक्ट्री के आसपास आवागमन प्रभावित रहा और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा। मौके पर बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे और उन्होंने अपनी मांगों को लेकर जोरदार नारेबाजी की। नारेबाजी के दौरान श्रमिक 8 घंटे काम करआए जाने की मांग करते रहे।
13 दिनों मेल 12 फैक्ट्रियों में हंगामा
कनपुर शहर और कानपुर देहात में 13 दिनों में 12 फैक्ट्रियों में हंगामा हो चुका है। लेकिन उद्योग और श्रमायुक्त विभाग के अफसर फैक्ट्री संचालकों के साथ सामंजस्य नहीं बनवा पा रहे है। सरकारी के द्वारा जारी वेतनमान अभी तक कानपुर में लागू नहीं हो पा रहा है। जिसके कारण शहर की अलग अलग फैक्ट्रियों में हंगामा किया जा रहा है। बीते दिनों में गोल्डी मसाले, बिरटानियां बिस्किट, नेरोलैक जैसी बड़ी कंपनियों में मजदूरों ने तय सैलरी की वजह से प्रदर्शन किया था। अब कानपुर में मजदूरों का प्रदर्शन बड़ा होते हुए दिखाई दे रहा है। जानकार बताते है, फैक्ट्री संचालकों की वजह से कानपुर मे मजदूरों का प्रदर्शन आने वाले समय में और उग्र हो सकता है।

घटना की सूचना मिलने पर गोविंदनगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। उन्होंने मजदूरों को समझा-बुझा कर कर्मचारियों को काम पर भेज दिया है। पुलिस ने कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच बातचीत कराकर समाधान निकालने की कोशिश की। अधिकारियों ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों और शिकायतों को संबंधित विभाग एवं फैक्ट्री प्रबंधन तक पहुंचाया जाएगा। जिसके बाद उग्र हुए मजदूर शांत हुए।