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दहेज प्रताड़ना से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कड़ी टिप्पणी की। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा कि लड़के और उसके परिवार की ओर से बहू और उसके परिवार का अपमान रोका जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि ऐसा संदेश जाना चाहिए कि बहू और उसके परिवार का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामला छत्तीसगढ़ में 2010 में हुई एक महिला की मौत से जुड़ा है। महिला की शादी के तीन साल के भीतर ससुराल में फांसी लगने से मौत हो गई थी। अभियोजन के मुताबिक, पति और उसके परिवार की ओर से लगातार दहेज की मांग की जा रही थी और उसे प्रताड़ित किया जा रहा था। लड़की के परिवार को भिखारी कहा जा रहा था सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा,कोशिश यही होती है कि बहू और उसके परिवार से और पैसे निकाले जाएं।” रिकॉर्ड पर मौजूद आरोपों का जिक्र करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “आखिर लड़के वालों ने क्या कहा था? तुम लोग भिखारी हो, पैसे नहीं दे सकते। लड़की का परिवार अपनी बेटी को बचाने की कोशिश कर रहा था और उन्हें भिखारी कहा जा रहा था।” जब याचिकाकर्ता के वकील ने जवाब देने की कोशिश की तो जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “आपको चुप रहना चाहिए था। लड़की के पिता ने कहा था कि वे 60 हजार रुपए दे सकते हैं और आप उन्हें भिखारी कह रहे हैं?” सुप्रीम कोर्ट पति के छोटे भाई की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। उसने IPC की धारा 498A (क्रूरता और प्रताड़ना) के तहत हुई सजा को चुनौती दी थी। कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने माना-दहेज की मांग का महिला की मौत से सीधा संबंध हाईकोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था इसी आधार पर पति के परिवार के कई सदस्यों को दहेज मृत्यु, आत्महत्या के लिए उकसाना और क्रूरता और प्रताड़ना की धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था। याचिकाकर्ता की ओर से FIR दर्ज कराने में देरी का मुद्दा भी उठाया गया। लेकिन कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा, “संदेश जाना चाहिए। बहुओं के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है।” सुनवाई के दौरान जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा, “ये पढ़े-लिखे लोग हैं।” सुप्रीम कोर्ट ने अंततः ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के निष्कर्षों को सही मानते हुए अपील खारिज कर दी। मामला सुचित केशरी बनाम छत्तीसगढ़ राज्य से जुड़ा है। ——————————— ये खबर भी पढ़ें: कॉकरोच जनता पार्टी का X अकाउंट अभी बंद ही रहेगा:दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार और X को नोटिस दिया, 4 हफ्ते में जवाब मांगा
दिल्ली हाईकोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके की याचिका पर केंद्र सरकार और X को नोटिस जारी किया है। दिपके ने CJP का X अकाउंट ब्लॉक किए जाने को चुनौती दी है। कोर्ट ने फिलहाल अकाउंट दोबारा चालू करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में फैसला लेने से पहले सरकार का पक्ष सुनना जरूरी है। पढ़ें पूरी खबर…
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सुप्रीम कोर्ट बोला-जिनसे पैसे लेते हो उन्हें भिखारी कहते हो:दहेज केस में कहा- बहू और उसके परिवार का अपमान बंद करें, देवर की सजा बरकरार