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भोपाल में चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा- मामले की गंभीरता, सबूत और जांच की स्थिति को देखते हुए आरोपी पक्ष को राहत देना उचित नहीं था। हाईकोर्ट ने देर रात आए कोर्ट ने 17 पन्नों का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने सुनवाई में सरकार के आवेदन को स्वीकार किया। अब सीबीआई की जांच पर निर्भर करेगा कि कब तक रिटायर्ड जज गिरिबाला की गिरफ्तारी हो सकती है। हाईकोर्ट ने माना कि अब इस पूरे मामले की जांच CBI को सौंप दी गई है, इसलिए जांच एजेंसी को केस में औपचारिक रूप से पक्षकार बनाया जाना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि मामले की संवेदनशीलता और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए निष्पक्ष जांच बेहद आवश्यक है। केस डायरी और साक्ष्यों का सही तरीके से परीक्षण नहीं किया गया सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने केस डायरी और साक्ष्यों का सही तरीके से परीक्षण नहीं किया। मृतक के शरीर पर चोटों के कई निशान थे, जिनका संतोषजनक जवाब आरोपी पक्ष नहीं दे सका। कोर्ट ने कहा कि आरोपी पक्ष ने जांच में पूरा सहयोग भी नहीं किया। आरोपी ने मीडिया में बयान देकर मृतका की छवि खराब करने की कोशिश की, जो जांच को प्रभावित करने वाला व्यवहार माना जा सकता है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने बढ़ाए सवाल कोर्ट ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि शरीर पर फांसी के अलावा अन्य चोटों के निशान भी पाए गए थे। मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार ये चोटें केवल शव को नीचे उतारने के दौरान नहीं आई थीं। इसी बिंदु को अदालत ने मामले में महत्वपूर्ण माना और कहा कि इन परिस्थितियों में गहन जांच की आवश्यकता है। गवाहों के बयानों में गंभीर आरोप हाईकोर्ट ने कहा कि ट्विशा शर्मा के परिवार और अन्य गवाहों के बयानों में स्पष्ट रूप से आरोप लगाए गए हैं कि सास और पति उस पर गर्भपात का दबाव डाल रहे थे। साथ ही दहेज की मांग और मानसिक प्रताड़ना के आरोप भी लगातार सामने आए हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का भी हवाला दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि अग्रिम जमानत केवल विशेष परिस्थितियों में ही दी जानी चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि निचली अदालत महत्वपूर्ण तथ्यों की अनदेखी करती है, तो हाईकोर्ट को जमानत रद्द करने का अधिकार है। आखिर में क्या बोला हाईकोर्ट? अपने अंतिम आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि मामले की गंभीरता, उपलब्ध साक्ष्य और जांच की मौजूदा स्थिति को देखते हुए 15 मई 2026 को दी गई अग्रिम जमानत न्यायोचित नहीं थी। इसी के साथ कोर्ट ने 10वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, भोपाल द्वारा दिया गया अग्रिम जमानत आदेश रद्द (Quash) कर दिया और दोनों याचिकाएं स्वीकार कर लीं। शादी के बाद शुरू हुई प्रताड़ना ट्विशा शर्मा के परिवार ने अदालत में आरोप लगाया कि 9 दिसंबर 2025 को शादी के बाद से ही उसे दहेज और गर्भावस्था को लेकर प्रताड़ित किया जाने लगा था। ट्विशा ने अपने माता-पिता को व्हाट्सऐप चैट्स के जरिए कई बार बताया था कि उसका पति और ससुराल वाले उस पर शक करते थे। परिजनों का आरोप है कि ट्विशा पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया जा रहा था। उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था और लगातार दहेज की मांग की जाती थी।
पति समर्थ सिंह को CBI ने कस्टडी में लिया मामले में आरोपी बनाए गए पति समर्थ सिंह को अदालत में पेश करने के बाद सीबीआई ने अपनी कस्टडी में ले लिया है। कोर्ट ने उसे 29 मई तक सीबीआई रिमांड पर भेजा है। अब एजेंसी उससे लगातार पूछताछ कर रही है। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी यह जानने की कोशिश कर रही है कि 12 मई की रात आखिर क्या हुआ था, घटना के बाद समर्थ की गतिविधियां क्या थीं और फरारी के दौरान वह किन लोगों के संपर्क में रहा? सीबीआई समर्थ के बयान का तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से मिलान कर रही है। एजेंसी ने पहले से जुटाए गए डिजिटल सबूतों और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की भी समीक्षा शुरू कर दी है। आने वाले दिनों में मामले में कई और लोगों से पूछताछ हो सकती है। जिसमें डॉक्टर, मर्ग के बाद पंचनामा कर्रवाई करने वाले पुलिस अधिकारी-कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। सीडीआर के आधार पर भी कई लोगों से पूछताछ की जाएगी। गिरिबाला सिंह और मायके पक्ष के बयान दर्ज सीबीआई की टीम अब तक ट्विशा की सास और गिरिबाला सिंह के बयान दर्ज कर चुकी है। इसके अलावा ट्विशा के मायके पक्ष से जुड़े परिजनों से भी विस्तृत पूछताछ की गई और बयान दर्ज किए हैं। जांच एजेंसी परिवार के बीच संबंधों, घटना से पहले हुए विवादों, फोन कॉल और व्यवहार संबंधी पहलुओं को भी जांच के दायरे में लेकर चल रही है। सूत्रों के अनुसार सीबीआई यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या घटना आत्महत्या थी या फिर इसके पीछे कोई साजिश अथवा दबाव की स्थिति थी। इसी कारण एजेंसी सभी पक्षों के बयान अलग-अलग समय पर लेकर उनका क्रॉस वेरिफिकेशन कर रही है। घटनास्थल पर तीसरी बार स्पॉट वेरिफिकेशन बुधवार को सीबीआई की टीम कटारा हिल्स स्थित उस घर पहुंची, जहां 12 मई की रात ट्विशा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। जांच अधिकारियों ने घर के अंदर और बाहर की परिस्थितियों का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान समर्थ सिंह को भी मौके पर ले जाया गया और उससे घटनाक्रम को लेकर जानकारी ली गई। बताया जा रहा है कि सीबीआई अधिकारियों ने कमरे की स्थिति, फर्नीचर की लोकेशन, दरवाजों की स्थिति और घटना के दौरान मौजूद लोगों की गतिविधियों को लेकर विस्तार से जानकारी जुटाई। इससे पहले भोपाल पुलिस और एसआईटी भी दो बार स्पॉट वेरिफिकेशन कर चुकी है। हालांकि अब सीबीआई स्वतंत्र रूप से हर तथ्य की पुष्टि कर रही है। हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत पर सुनवाई इधर, मामले में एक और बड़ा घटनाक्रम मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में देखने को मिला। रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत निरस्त करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई को भी मामले में पक्षकार बनाया है। माना जा रहा है कि सीबीआई द्वारा की जा रही जांच और नए तथ्यों को अदालत गंभीरता से देख रही है। अब हाईकोर्ट के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। 12 मई की रात हुई थी ट्विशा की मौत 12 मई की रात भोपाल के कटारा हिल्स में ट्विशा की संदिग्ध हालात में मौत हुई थी। ससुराल पक्ष इसे आत्महत्या बता रहा है, जबकि मायके पक्ष ने पति और ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाया है। 24 मई को भोपाल AIIMS में दिल्ली AIIMS की टीम ने ट्विशा की डेड बॉडी का दोबारा पोस्टमॉर्टम किया। इसके बाद शाम को मौत के 12 दिन बाद भदभदा श्मशान घाट में ट्विशा का अंतिम संस्कार किया गया। भाई मेजर हर्षित ने उन्हें मुखाग्नि दी। मामले से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें…
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एक्ट्रेस ट्विशा केस- रिटायर्ड जज गिरिबाला की जमानत रद्द:जबलपुर हाईकोर्ट ने 17 पन्नों का जारी किया आदेश; CBI जांच से तय होगी सास की गिरफ्तारी