लिव-इन में जन्मी बेटी से बात कर पाएंगे पिता:मां जयपुर की, पिता लंदन में रहते हैं; कोर्ट बोला- बच्चे को दूर नहीं कर सकते


लंदन में रह रहा पिता, जयपुर में रह रही अपनी 3 साल की बेटी से अब बात कर पाएंगे। कोर्ट ने साफ कहा है कि बच्ची को उसके पिता के प्यार से दूर नहीं किया जा सकता। जयपुर की फैमिली कोर्ट-4 ने पिता को बड़ी अंतरिम राहत दी है। अदालत ने पिता की याचिका पर सुनवाई की। इसमें मां को निर्देश दिए हैं कि वह हर महीने के दूसरे और चौथे रविवार को दोपहर 12:00 से 1:30 बजे तक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए पिता की अपनी साढ़े तीन साल की बेटी से बातचीत करवाए। इसके साथ ही अदालत ने मां को यह भी पाबंद किया है कि वह बच्ची की शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी हर महीने की प्रोग्रेस रिपोर्ट भी पिता को भेजेगी। कोर्ट ने यह आदेश पोलैंड के मूल निवासी और वर्तमान में लंदन में रह रहे पिता के प्रार्थना पत्र पर दिया है। गोवा में हुई थी मुलाकात, 2022 को हुआ बेटी का जन्म पिता की मुलाकात जयपुर की रहने वाली एक युवती से साल 2022 में गोवा में हुई थी। इसके बाद दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगे। लिव-इन के दौरान ही 16 दिसंबर 2022 को उनकी बेटी का जन्म हुआ। कुछ समय तक दोनों के बीच सब कुछ ठीक-ठाक रहा। बाद में दोनों के संबंधों में विवाद शुरू हो गया। विवाद बढ़ने के बाद मां बच्ची को लेकर अलग हो गई। उसने पिता को बेटी से मिलने और बात करने से रोक दिया। वकील की दलील- बच्चे के मानसिक विकास पर पड़ेगा असर पिता की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सुनील शर्मा और गौरव सिंघल ने अदालत में बेटी की कस्टडी के लिए मुख्य याचिका दायर की है। वकीलों ने अंतरिम राहत की मांग करते हुए दलील दी कि यदि इतनी छोटी बच्ची को उसके पिता के प्रेम और वात्सल्य से दूर रखा गया, तो इसका सीधा असर बच्ची के शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ेगा। इसलिए जब तक मुख्य याचिका पर फैसला नहीं आता, तब तक पिता की बेटी से फोन या वीडियो कॉल पर बातचीत कराई जाए। मां ने की थी अर्जी खारिज करने की मांग दूसरी ओर, मां ने कोर्ट में जवाब पेश कर पिता के इन दावों को पूरी तरह नकार दिया। मां की ओर से कहा गया कि प्रार्थी (पिता) ने पूरी तरह से आधारहीन और तथ्यों से परे प्रार्थना पत्र पेश किया है, जिसे खारिज किया जाना चाहिए। कोर्ट का फैसला फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और बच्ची के भविष्य को ध्यान में रखते हुए मां के दावों को नकार दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी संतान को उसके पिता के स्नेह से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने अंतरिम राहत मंजूर करते हुए महीने में दो बार वीडियो कॉल के जरिए पिता-बेटी की बातचीत करवाने और हर महीने बच्ची की हेल्थ व एजुकेशन रिपोर्ट शेयर करने के आदेश जारी किए हैं।

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