बांके बिहारी मंदिर प्रबंध समिति में बदलाव:समिति में 3 सदस्य बदले, सुप्रीम कोर्ट ने गोस्वामी समाज के सुझावों पर विचार करने के दिए निर्देश


प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक याचिका पर महत्वपूर्ण सुनवाई करते हुए धार्मिक परम्पराओं के निर्वहन के लिए गोस्वामी समाज के सुझावों पर विचार करने के निर्देश हाई पावर्ड कमेटी को दिए हैं। साथ ही समिति में गोस्वामी समाज की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित करते हुए राजभोग से रजत गोस्वामी और शैलेंद्र गोस्वामी के साथ शयन भोग से गोपेश गोस्वामी व हिमांशु गोस्वामी को नामित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रबंध समिति के सदस्यों को लेकर दाखिल की थी याचिका प्रसिद्ध ठाकुर श्री बांके बिहारी मंदिर में भीड़ प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधा सुरक्षा के दृष्टिगत सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया था। जिसमें समिति द्वारा नियमानुसार राजभोग और शयनभोग सेवा से दो दो गोस्वामी नामित किए गए थे। जिसे मंदिर की पूर्व में गठित प्रबंध समिति के सदस्यों गोपेश गोस्वामी और रजत गोस्वामी द्वारा उच्चतम न्यायालय में चुनौती देते हुए याचिका 001228/2025 दायर की गई थी। यह की थी मांग दाखिल की गई याचिका में हाई पावर कमेटी द्वारा प्राचीन मंदिर की धार्मिक अनुष्ठानों में निर्धारित परम्पराओं में हस्तक्षेप न करने की मांग की गई थी। इसके अलावा मंदिर के समय में बदलाव व धार्मिक मान्यताओं में सेवायत गोस्वामी समाज के सुझावों को अहमियत देने की मांग भी थी। इस महत्वपूर्ण याचिका पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि सेवायत गोस्वामी समाज मंदिर की धार्मिक परम्पराओं को समझने वाले है। हाई पावर कमेटी गोस्वामी समाज की राय पर विचार करें। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार मंदिर के विकास को लेकर एक डेवलपमेंट प्लान तैयार करें जिसमें क्राउड मैनजमेंट के अलावा पार्किंग एवं अन्य मूलभूत सुविधाएं शामिल हो। उन्होंने कहा कि मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ बढ़ने से विकास भी हो लेकिन गोस्वामी समाज के पारंपरिक हितों का ध्यान रखते हुए उन्हें साथ भी लेकर चलना होगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत जस्टिस और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ के इस आदेश के बाद अब हाई पावर कमेटी में ठाकुर बांके बिहारी के राजभोग और शयन भोग सेवाधिकारियों में से दो दो चुने हुए प्रतिनिधि ही शामिल होंगे वही समाज की आवाज माने जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि शयन भोग से गोपेश गोस्वामी और हिमांशु गोस्वामी और राजभोग सेवाधिकारी रजत गोस्वामी और शैलेंद्र गोस्वामी को समिति में शामिल करने का आदेश दिया। पिछले साल अगस्त में इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर जज जस्टिस अशोक कुमार की अगुआई में मथुरा के डीएम सहित अन्य अधिकारियों और गोस्वामी समाज के चार प्रतिनिधियों की समिति बनाई थी ताकि मंदिर के अंदर बाहर दर्शन और भीड़ का बेहतर प्रबंधन हो सके। कोर्ट ने राज्य सरकार से किया आग्रह कोर्ट ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि वह वृंदावन और बांके बिहारी मंदिर के अंदर और आसपास श्रद्धालुओं की सुविधा सहूलियत और भीड़ प्रबंधन के लिए समुचित व्यवस्था की योजनाएं बनाकर उन पर शीघ्र अमल करे। इसमें सड़कों का चौड़ीकरण और सड़कों पर व्यावसायिक गतिविधियों पर बेहतर काम किए जाएं। इसके अलावा पीने का पानी, रेस्ट रूम, होटल, अस्पताल, वेटिंग एरिया, आपातकालीन सुविधाजनक निकास, पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बैटरी चालित वाहन, बुजुर्ग लोगों के लिए खास सुविधाजनक इंतजाम आदि पर ध्यान दिया जाए। इस बाबत कमेटी गोस्वामी समाज और स्थानीय लोगों के सुझाव सुनकर एक परियोजना तैयार कर कोर्ट के समक्ष लाए। प्रशासनिक कारण बताकर न किया जाए बदलाब सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के एम नटराज ने कहा कि वृंदावन के पूरे विकास और कॉरिडोर का मास्टर प्लान बन रहा है। याचिकाकर्ता गोस्वामी समाज की पैरवी करते हुए सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने कहा कि चार सौ साल से पुराने इस मंदिर की ऐतिहासिक परंपरा, दैनिक सेवा पूजा, राग भोग, दर्शन समय आदि से कमेटी ने छेड़छाड़ की है। इसे लेकर बिहारी जी के सेवाधिकारी और श्रद्धालुओं में नाराजगी थी। इस मंदिर की बहुत सी प्रथा, परम्परा और रस्में और उनके स्थान और समय ऐतिहासिक और अपरिवर्तित हैं। जैसे दैनिक चर्या, देहरी पूजन, भोग समय, विश्राम काल, गर्मियों में फूल बंगलों की सेवा आदि में प्रशासनिक कारण बता कर बेवजह बदलाव न किया जाए। कॉरिडोर के लिए हुई 14 डीड श्याम दीवान ने दलील दी कि फूलबंगलों की सेवा के लिए लाख रुपए शुल्क, लाइव टेलीकास्ट के लिए ठाकुर जी के समक्ष तेज हैलोजेन लाइट लगाने से भी दिक्कत होती है क्योंकि ठाकुर जी की सेवा बाल रूप में है। इस पर एएसजी नटराज ने कहा कि कमेटी गोस्वामी समाज के साथ बैठक कर उनके सुझाव भी कोर्ट के समक्ष रखेगी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि विकास कार्यों के मद्देनजर भूमि अधिग्रहण का काम तेजी से बढ़ रहा है। अब तक 14 सेल डीड हो चुकी हैं। अभी तक तो मंदिर कोष से ही धन भुगतान किया जा रहा है। लेकिन कोर्ट का आदेश हो तो सरकार उस धन को मंदिर कोष में जमा कर देगी। कोर्ट ने भी मंदिर की ओर जाने वाली संकरी तंग गलियों पर चिंता जताई क्योंकि सुरक्षा को लेकर ये गंभीर प्रश्न है। अब पारंपरिक ढंग से भीड़ प्रबंधन मुमकिन नहीं है। आधुनिक तकनीक की सहायता से भीड़ को समुचित स्थानों पर सुविधा के साथ रोक रोक कर दर्शन कराने के इंतजाम करने होंगे। लाइव स्ट्रीमिंग पर रखा पक्ष बांके बिहारी मंदिर की लाइव दर्शन परियोजना को लेकर उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के दौरान मंदिर निधि की पारदर्शिता, क्यूआर कोड दान व्यवस्था और लाइव स्क्रीन पर विज्ञापनों को लेकर सवाल उठाए गए। आवेदक लोक कल्याण मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक और प्रख्यात पत्रकार अनिल गुप्ता की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने कहा कि मामला केवल लाइव स्ट्रीमिंग का नहीं, बल्कि भक्तों की आस्था, सार्वजनिक ट्रस्ट और न्यायालय-पर्यवेक्षित समिति की जवाबदेही से जुड़ा संवैधानिक प्रश्न है। सुनवाई के दौरान आवेदक पक्ष ने समिति के प्रतिउत्तर हलफनामे का हवाला देते हुए कहा कि समिति ने स्वयं स्वीकार किया है कि लाइव दर्शन स्क्रीन पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से श्रद्धालु ऑनलाइन दान कर सकते हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि दान किस खाते में जा रहा है, उसका ऑडिट कौन कर रहा है और दान-लेज़र व बैंक विवरण क्या हैं। अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने न्यायालय में कहा कि जब भक्तों की आस्था डिजिटल माध्यम से धन में परिवर्तित हो रही है, तब बैंक ट्रेल, यूपीआई विवरण, संविदा, कार्यादेश और लेखापरीक्षा अभिलेखों को छिपाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक आस्था से जुड़े मामलों में जवाबदेही संवैधानिक दायित्व है। रियल स्टेट विज्ञापन का उठा मुद्दा मामले में लाइव दर्शन स्क्रीन पर रियल एस्टेट विज्ञापन दिखाए जाने का मुद्दा भी उठा। समिति ने अपने प्रतिउत्तर में कहा कि विज्ञापन दिखाने की अनुमति नहीं दी गई थी, जबकि आवेदक पक्ष ने दावा किया कि स्क्रीन पर क्यूआर कोड के साथ व्यावसायिक विज्ञापन प्रदर्शित किए गए। अधिवक्ता गोस्वामी ने कहा कि यदि विज्ञापन अनुमति से चले तो हलफनामा भ्रामक है और यदि बिना अनुमति चले तो समिति अपने पर्यवेक्षी दायित्व में विफल रही है। उन्होंने कहा कि ठाकुर बांके बिहारी जी का दर्शन किसी व्यावसायिक स्क्रीन में परिवर्तित नहीं किया जा सकता।

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