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गोरखपुर में भीषण गर्मी, तेज धूप और बढ़ती उमस का असर अब चिड़ियाघर के वन्यजीवों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। गर्मी और लू से जानवरों को राहत देने, डिहाइड्रेशन से बचाने और उनकी सेहत ठीक रखने के लिए अब उन्हें हल्का, ताजा और पानी वाली चीजें ज्यादा मात्रा में दी जा रही हैं। मांसाहारी और शाकाहारी दोनों तरह के वन्यजीवों के खाने की मात्रा और प्रकार मौसम के हिसाब से बदले गए हैं। इसके साथ ही डॉक्टरों की टीम लगातार वन्यजीवों की निगरानी कर रही है ताकि गर्मी के कारण किसी भी जानवर की तबीयत खराब न हो। तस्वीरें देखिए… बाघ और शेर का मांस घटाया गया बाघ, शेर और तेंदुओं की डाइट में सबसे बड़ा बदलाव किया गया है। पहले इन्हें रोज करीब 10 से 12 किलो मांस दिया जाता था, लेकिन अब मात्रा घटाकर करीब 8 से 9 किलो कर दी गई है। यानी हर जानवर की डाइट में करीब 2 से 3 किलो तक कमी की गई है। पशु चिकित्सक डॉ. योगेश प्रताप सिंह के अनुसार गर्मी में ज्यादा भारी और फैट वाला भोजन पाचन पर असर डालता है, इसलिए हल्का और ताजा मांस दिया जा रहा है। कई बार मांस के साथ बर्फ के टुकड़े भी रखे जा रहे हैं ताकि जानवरों को ठंडक मिल सके। भालुओं को दिए जा रहे ठंडे फल और दही भालुओं की डाइट में ठंडी चीजों की मात्रा बढ़ाई गई है। पहले उन्हें सामान्य फल और रोटी दी जाती थी, लेकिन अब रोज करीब 3 से 4 किलो तरबूज, खीरा और ककड़ी के साथ करीब आधा से एक किलो दही और शहद दिया जा रहा है। फलों की मात्रा पहले के मुकाबले करीब डेढ़ गुना तक बढ़ाई गई है। हाथी का हरा चारा बढ़ाया गया
हाथी के खाने में भी बदलाव किया गया है। पहले उन्हें करीब 80 से 100 किलो हरा चारा और सीमित मात्रा में गन्ना व केला दिया जाता था, लेकिन अब हरे चारे की मात्रा बढ़ाकर करीब 120 किलो तक कर दी गई है। इसके साथ 10 से 15 किलो गन्ना, 8 से 10 दर्जन केले और भीगा चना भी दिया जा रहा है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो। शाकाहारी जानवरों को पानी वाले फल ज्यादा
चीतल, सांभर, बारहसिंगा और नीलगाय जैसे शाकाहारी जानवरों को पहले मुख्य रूप से हरा चारा और दाना दिया जाता था, लेकिन अब उनकी डाइट में रोज 2 से 5 किलो तक तरबूज, खीरा, ककड़ी और गाजर बढ़ाई गई है। अधिकारियों के अनुसार पानी वाले फलों की मात्रा पहले के मुकाबले करीब 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ाई गई है। बंदरों को पहले सामान्य मात्रा में फल दिए जाते थे, लेकिन अब उन्हें रोज केला, सेब, संतरा और खीरा ज्यादा मात्रा में दिया जा रहा है। वहीं कई पक्षियों को भी तरबूज और दूसरे ठंडे फल खिलाए जा रहे हैं ताकि उन्हें डिहाइड्रेशन से बचाया जा सके। गर्मी से बचाव के लिए किए गए खास इंतजाम
चिड़ियाघर प्रशासन ने वन्यजीवों को गर्मी से बचाने के लिए कई विशेष व्यवस्थाएं भी की हैं। सुबह से ही सभी बाड़ों में पानी का छिड़काव कराया जा रहा है। कई जगह फॉगर्स और स्प्रिंकलर लगाए गए हैं, जिनसे लगातार ठंडी फुहार निकलती रहती है। बड़े जानवरों के बाड़ों में अतिरिक्त छांव की व्यवस्था की गई है और पानी के टैंक लगातार भरे रखे जा रहे हैं। नाइट सेल में कूलर और एसी की व्यवस्था
बाघ, शेर और दूसरे संवेदनशील जानवरों के नाइट सेल में कूलर और एसी लगाए गए हैं। कई बाड़ों में एग्जॉस्ट फैन और अतिरिक्त वेंटिलेशन की व्यवस्था भी की गई है ताकि गर्म हवा जमा न हो सके। हाथियों और भालुओं को दिन में कई बार नहलाया जा रहा है, जबकि उनके बाड़ों में पानी और कीचड़ वाले हिस्से बनाए गए हैं ताकि वे लंबे समय तक ठंडक में रह सकें। प्राणि उद्यान के उप निदेशक और पशु चिकित्सक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि गर्मी को देखते हुए सभी वन्यजीवों की डाइट और देखभाल में बदलाव किया गया है। जानवरों को ताजा भोजन, पर्याप्त पानी और ठंडा माहौल देने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कर्मचारियों और डॉक्टरों की टीम लगातार निगरानी कर रही है ताकि किसी भी जानवर को गर्मी से परेशानी न हो।
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गोरखपुर चिड़ियाघर में बदली वन्यजीवों की डाइट:बाघ का घटाया गया मांस, शाकाहारी डाइट में बढ़ाए गए पानी वाले फल